चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में पेश किया 'झूठ का पुलिंदा', योगेंद्र यादव ने दागे 7 सवाल
राजनीतिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने चुनाव आयोग पर सुप्रीम कोर्ट में झूठ बोलने का आरोप लगाया और वोटर लिस्ट को लेकर 7 सवाल पूछे।

राजनीतिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने भारतीय चुनाव आयोग (ECI) पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए उसे निशाने पर लिया है। यादव का दावा है कि चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के संशोधन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जो जवाब दाखिल किया है, वह असल में "झूठ का एक पुलिंदा" है। उन्होंने चेतावनी दी है कि जब तक आयोग उनके सात महत्वपूर्ण सवालों के पारदर्शी जवाब नहीं देता, तब तक 'वोट चोरी' के आरोप पीछा नहीं छोड़ेंगे।
योगेंद्र यादव ने आयोग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए अपनी बात रखी। उन्होंने सबसे पहले निर्णय लेने की प्रक्रिया और दस्तावेजों की मांग की। उन्होंने पूछा कि SIR पर फैसला किस दिन, किस अधिकार से और कहां लिया गया, और उसका दस्तावेज़ सार्वजनिक किया जाए। साथ ही उन्होंने फॉर्म 6 में किए गए बदलावों और चुनावी पंजीकरण अधिकारियों (ERO) की शक्तियों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि अगर आयोग का दावा है कि ERO की शक्तियां नहीं छीनी गईं, तो गोवा और महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) बार-बार यह क्यों मांग रहे थे कि उनके ERO को यह शक्ति दी जाए?
वोटर लिस्ट में गड़बड़ी और बल्क डिलीशन पर उठाए सवाल
पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में मतदाता सूची के प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए योगेंद्र यादव ने कहा कि बंगाल में लाखों आवेदन और अपील एक ही मिनट में कैसे दाखिल हो गए? उन्होंने उस अधिकारी का नाम पूछा जिसने यह काम किया और यह भी जानना चाहा कि मिनटों में लाखों मामलों पर फैसला कैसे लिया गया। इसके अलावा, उन्होंने 'लॉजिकल विसंगति' के लिए इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर, नोटिस जारी करने की प्रक्रिया और उसके SOP के बारे में भी जवाब मांगा।
बल्क डिलीशन (थोक में नाम हटाना) के मुद्दे पर उन्होंने पूछा कि फॉर्म 7 बड़ी संख्या में कैसे दाखिल किए गए और किस कानून के तहत कोई सरकारी अधिकारी फॉर्म 7 जमा कर सकता है। उन्होंने पीलीभीत में फॉर्म 8 के बल्क फाइलिंग का उदाहरण देते हुए आशंका जताई कि कहीं ऐसा पूरे देश में तो नहीं हो रहा है।
इन गंभीर आरोपों के बीच, योगेंद्र यादव ने 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली एक बड़ी रैली का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि अब अलग-अलग विरोध प्रदर्शन खत्म हो गए हैं और INDIA गठबंधन, युवा संगठन, नागरिक समाज और CJP जैसे मंच एक साथ आ गए हैं। इस महा-रैली की केवल तीन मुख्य मांगें हैं: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) का इस्तीफा, 2023 के कानून को रद्द करना और SIR को वापस लेना।