यमुना में फिर लौटा जहरीला झाग, मनोज तिवारी के सफाई के दावों की खुली पोल
बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने यमुना की सफाई का दावा किया था, लेकिन कालिंदी कुंज में फिर दिखा जहरीला झाग। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

दिल्ली की जीवनरेखा कही जाने वाली यमुना नदी एक बार फिर जहरीले सफेद झाग की चादर में लिपटी नजर आ रही है। यह स्थिति तब सामने आई है जब बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने दावा किया था कि दिल्ली से गुजरने वाले 58 किलोमीटर के हिस्से में से करीब 30 किलोमीटर नदी को सफलतापूर्वक साफ कर लिया गया है। हालांकि, कालिंदी कुंज से सामने आए वीडियो फुटेज ने इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जहां नदी की सतह पर मोटा और जहरीला झाग तैरता दिख रहा है।
सांसद मनोज तिवारी ने 29 अक्टूबर 2026 को सोनिया विहार में नदी में डुबकी लगाई थी और इस सुधार का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और मंत्री परवेश वर्मा को दिया था। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के सितंबर 2026 के आंकड़े एक भयानक पर्यावरणीय संकट की ओर इशारा करते हैं। ISBT ब्रिज के पास पानी की जांच में बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) 30 मिलीग्राम प्रति लीटर पाई गई, जो नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) द्वारा निर्धारित 3 मिलीग्राम की सीमा से दस गुना ज्यादा है। इसके अलावा, फेकल कोलीफॉर्म का स्तर 35,000 दर्ज किया गया, जबकि इसकी सुरक्षित सीमा केवल 500 है।
सियासी घमासान और दावों की हकीकत
नदी की इस हालत ने दिल्ली की राजनीति में उबाल ला दिया है। आम आदमी पार्टी के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने मनोज तिवारी और जल मंत्री परवेश वर्मा को चुनौती दी है कि वे कालिंदी कुंज घाट पर जाकर यमुना का पानी पिएं। भारद्वाज का कहना है कि जैसे ही नजफगढ़ नाला नदी में मिलता है, प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ जाता है। दूसरी ओर, मंत्री परवेश वर्मा ने इससे पहले दावा किया था कि 52 किलोमीटर के दायरे में कोई झाग नहीं है, लेकिन DPCC ने स्पष्ट किया है कि यह झाग केवल पानी की हलचल से नहीं, बल्कि प्रदूषकों (surfactant foam) की वजह से बन रहा है।
यमुना को बचाने के लिए बड़े स्तर पर निवेश तो किया जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 8,941 करोड़ रुपये की 43 परियोजनाएं शुरू की हैं, जिनका लक्ष्य मई 2029 तक नदी को साफ करना है। साथ ही, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी बहाली के लिए करीब 9,000 करोड़ रुपये के बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन किया है। इसके बावजूद, रिपोर्ट बताती है कि निगरानी किए गए 23 हिस्सों में से 22 मानक स्तर पर फेल रहे हैं, और केवल पल्ला एंट्री पॉइंट ही सुरक्षित पाया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि NGT के तय लक्ष्यों को पूरा न कर पाने के कारण यमुना वर्तमान में 'पारिस्थितिक रूप से मृत' (ecologically dead) स्थिति में है।