यमुना रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट से बढ़ सकता है बाढ़ का खतरा, विशेषज्ञों ने सरकार को चेताया

विशेषज्ञों ने दिल्ली सरकार को चेतावनी दी है कि साबरमती मॉडल पर आधारित यमुना रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट शहर में बाढ़ के जोखिम को बढ़ा सकता है।

Kittu Kumari3 November 20262 min read0 viewsDelhi Local
यमुना रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट से बढ़ सकता है बाढ़ का खतरा, विशेषज्ञों ने सरकार को चेताया

दिल्ली में यमुना नदी के किनारे सौंदर्यीकरण और विकास के लिए प्रस्तावित यमुना रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट खतरा बन सकता है। पर्यावरणविदों, जल विशेषज्ञों और नागरिक समूहों ने दिल्ली और केंद्र सरकार से इस योजना पर पुनर्विचार करने की पुरजोर मांग की है। उनका मानना है कि 52 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट से राजधानी में बाढ़ का जोखिम काफी बढ़ जाएगा, जो शहर के लिए घातक साबित हो सकता है।

यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब दिल्ली सरकार और साबरमती रिवरफ्रंट डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (SRFDCL) के बीच एक समझौता हुआ। इस योजना के तहत अहमदाबाद के साबरमती रिवरफ्रंट मॉडल को दिल्ली में उतारने की कोशिश की जा रही है। इस प्रोजेक्ट को दो चरणों में बांटा गया है, जिसमें पल्ला से वजीराबाद और वजीराबाद से कालिंदी कुंज तक के हिस्सों को विकसित किया जाना है।

साबरमती मॉडल दिल्ली के लिए क्यों है गलत?

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विशेषज्ञों का तर्क है कि साबरमती और यमुना नदियों की प्रकृति पूरी तरह अलग है। साबरमती एक मौसमी नदी है, जबकि यमुना एक बारहमासी और ग्लेशियर से निकलने वाली नदी है। ऐसे में साबरमती के मॉडल को वैज्ञानिक रूप से यमुना पर लागू करना गलत होगा। पूर्व जल संसाधन सचिव शशि शेखर और वैज्ञानिक डॉ. रवि चोपड़ा जैसे दिग्गजों का कहना है कि इस प्रोजेक्ट से नदी की प्राकृतिक जल वहन क्षमता कम हो जाएगी और बाढ़ के मैदानों (floodplains) का संपर्क टूट जाएगा।

विरोध कर रहे समूहों, जिनमें 'यमुना जिये अभियान' और 'साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम, रिवर्स एंड पीपल' (SANDRP) शामिल हैं, ने इस बात पर भी सवाल उठाए हैं कि अब तक इस प्रोजेक्ट की कोई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) या पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) सार्वजनिक नहीं की गई है। बिना किसी प्री-फिजिबिलिटी स्टडी के इतना बड़ा प्रोजेक्ट शुरू करना जोखिम भरा है।

इसके अलावा, दिल्ली सरकार द्वारा यमुना के किनारे करीब 99 करोड़ रुपये की लागत से 4.7 किलोमीटर लंबी कंक्रीट की दीवार बनाने के प्रस्ताव ने भी चिंताएं बढ़ा दी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि 2023 और 2025 में दिल्ली ने जो भीषण बाढ़ देखी है, उसे देखते हुए ऐसे निर्माण कार्य बाढ़ के पानी को सोखने की जमीन की क्षमता को खत्म कर देंगे, जिससे आने वाले समय में खतरा और बढ़ जाएगा।

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