साबरमती मॉडल पर संवरेगा यमुना तट, दिल्ली सरकार शुरू करेगी रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट

राजधानी दिल्ली की जीवनरेखा कही जाने वाली यमुना नदी अब एक नए और आधुनिक रूप में नजर आएगी। दिल्ली सरकार ने यमुना के किनारों को पुनर्जीवित और सुंदर बनाने के लिए एक व्यापक पहल शुरू की है। इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए अहमदाबाद के मशहूर साबरमती रिवरफ्रंट मॉडल को आधार बनाया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि यमुना के तटों को न केवल साफ किया जाए, बल्कि उन्हें दुनिया स्तरीय पर्यटन और मनोरंजन स्थल के रूप में विकसित किया जाए।
इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत पल्ला से लेकर कालिंदी कुंज तक कुल 52 किलोमीटर के दायरे को कवर किया जाएगा। प्रोजेक्ट को दो मुख्य चरणों में बांटा गया है—पहला चरण पल्ला से वजीराबाद तक और दूसरा चरण वजीराबाद से ओखला बैराज के पास कालिंदी कुंज तक होगा। तकनीकी विशेषज्ञता हासिल करने के लिए दिल्ली सरकार और साबरमती रिवरफ्रंट डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (SRFDCL) के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) तैयार किया जा रहा है।
साइकिल ट्रैक और स्पोर्ट्स ग्राउंड से सजेगा रिवरफ्रंट
दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने भरोसा जताया है कि इस रिवरफ्रंट मॉडल की झलक मौजूदा प्रशासनिक कार्यकाल के भीतर ही जनता को मिल जाएगी। इस प्रोजेक्ट के जरिए यमुना किनारे साइकिल ट्रैक, वॉकिंग पाथ, स्पोर्ट्स ग्राउंड, मनोरंजक पार्क और खुले सार्वजनिक स्थानों का निर्माण किया जाएगा। फिलहाल विशेषज्ञों की एक टीम साबरमती मॉडल का अध्ययन कर रही है ताकि दिल्ली की पर्यावरणीय जरूरतों के हिसाब से इसमें जरूरी बदलाव किए जा सकें। दिल्ली जल बोर्ड और सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग की देखरेख में इस पूरी योजना को अंजाम दिया जाएगा।
सिर्फ सुंदरता ही नहीं, बल्कि नदी की सफाई पर भी जोर दिया जा रहा है। पिछले 18 महीनों में दिल्ली के 37 में से 28 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) को अपग्रेड किया गया है और क्षमता बढ़ाने के लिए नए प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जल प्रबंधन और सीवेज ट्रीटमेंट के लिए 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मंजूर की है, जिसमें नजफगढ़ इलाके में 12 विकेंद्रीकृत एसटीपी भी शामिल हैं।
वहीं, केंद्र सरकार भी इस दिशा में सक्रिय है। गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में 2027 तक 59 नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसकी प्रगति की समीक्षा हर 20 दिन में की जाएगी। इन तमाम कोशिशों का मकसद यमुना को प्रदूषण मुक्त कर एक स्वच्छ और हरित रिवरफ्रंट तैयार करना है।