यमुना की गहराई नापेगा सोनार: बाढ़ रोकने और मास्टर प्लान 2047 के लिए दिल्ली सरकार का बड़ा कदम

राजधानी दिल्ली में बाढ़ के खतरे को कम करने और शहर के भविष्य की रूपरेखा तैयार करने के लिए दिल्ली सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग ने एक बड़ी पहल की है। विभाग ने यमुना नदी के 98 वर्ग किलोमीटर के बाढ़ क्षेत्र (floodplain) के व्यापक टोपोग्राफिकल और बाथमीट्रिक सर्वे के लिए आधिकारिक तौर पर टेंडर जारी किया है। इस पूरी प्रक्रिया की शुरुआत 3 अक्टूबर 2026 से हो चुकी है, जिसका मुख्य उद्देश्य आधुनिक सोनार तकनीक के जरिए नदी की गहराई और उसकी बनावट का सटीक आकलन करना है।
इस प्रोजेक्ट के तहत नदी के 15 वर्ग किलोमीटर के प्रवाह क्षेत्र में इको-साउंडर और सोनार बाथमीट्रिक सर्वे किया जाएगा। यह पूरा काम आठ महीनों में पूरा होने की उम्मीद है। यह सर्वे न केवल नदी के बहाव और गहराई की जानकारी देगा, बल्कि इससे भविष्य में होने वाले डिसिल्टिंग (गाद निकालने) के कामों और बुनियादी ढांचे के विकास में बड़ी मदद मिलेगी। यह पूरी कवायद दिल्ली के 'मास्टर प्लान-2047' का एक अहम हिस्सा है, जिसे 21 अगस्त 2026 को जारी किया गया था और जिसका जोर 'ग्रीन-ब्लू इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क' बनाने पर है।
बाढ़ से बचाव के लिए 'ग्रेट वॉल ऑफ यमुना' और अन्य इंतजाम
नदी के पारिस्थितिक तंत्र को बचाने और शहर को सुरक्षित करने के लिए कई स्तरों पर काम चल रहा है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने 30 सितंबर 2026 को एक सार्वजनिक परामर्श बैठक की, जिसमें बाढ़ क्षेत्र के भीतर 'नो-एक्टिविटी जोन' निर्धारित करने और विभागों के बीच बेहतर तालमेल पर चर्चा हुई। उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने भी इन पारिस्थितिक बहाली प्रयासों के संबंध में विशेष निर्देश दिए हैं।
बाढ़ नियंत्रण के लिए सरकार ने जून 15 से अक्टूबर 15 तक के मानसून सीजन के लिए कड़े आदेश लागू किए हैं, जिसमें 24x7 कंट्रोल रूम और थ्री-टियर अलर्ट सिस्टम शामिल है। इसके अलावा, रिहायशी इलाकों को बचाने के लिए 5 किलोमीटर लंबी एक बाढ़ नियंत्रण दीवार का निर्माण किया जा रहा है, जिसे 'ग्रेट वॉल ऑफ यमुना' का नाम दिया गया है।
इस पूरी मुहिम में DDA, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति, केंद्रीय भूजल बोर्ड, PWD और नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा जैसे संस्थान मिलकर काम कर रहे हैं। नदी में गिरने वाले 22 मुख्य नालों की सफाई के लिए ट्रैश स्किमर, वीड हार्वेस्टर और एम्फीबियस एक्सकेवेटर जैसी मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि यमुना को स्वच्छ और सुरक्षित बनाया जा सके।