मानसून की बारिश भी नहीं आई काम, सितंबर में और जहरीली हुई यमुना

राजधानी दिल्ली की जीवनरेखा कही जाने वाली यमुना नदी की हालत एक बार फिर चिंताजनक हो गई है। आमतौर पर मानसून की बारिश से नदी का पानी साफ होता है और प्रदूषण कम होता है, लेकिन इस बार मामला उल्टा रहा। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के ताजा आंकड़ों ने चौंकाने वाला खुलासा किया है कि सितंबर महीने में यमुना के कई हिस्सों में प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ गया है। अगस्त में पानी की गुणवत्ता में मामूली सुधार देखा गया था, लेकिन सितंबर आते-आते स्थिति फिर से बिगड़ गई।
DPCC की रिपोर्ट के मुताबिक, पानी में घुलनशील ऑक्सीजन की मात्रा यानी बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) का स्तर तय सीमा (3 mg/l) से कहीं ज्यादा पाया गया है। सबसे बदतर स्थिति ISBT पुल के पास देखी गई, जहां BOD का स्तर 30 mg/l तक पहुंच गया, जबकि पिछले साल इसी समय यह केवल 8 mg/l था। इसी तरह ITO पुल पर भी यह स्तर 4 mg/l से बढ़कर 18 mg/l हो गया है। इसके अलावा, पानी में बैक्टीरिया (Faecal coliform) की मात्रा में भी भारी उछाल आया है। ISBT पुल पर यह संख्या 2,800 से बढ़कर 35,000 MPN/100 ml हो गई है, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 12.5 गुना ज्यादा है।
सफाई के लिए सरकार का नया प्लान और मेगा ड्राइव
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दौरान ऊपरी इलाकों से आने वाले पानी और सीवेज की भारी मात्रा ने नदी के पानी को साफ करने के बजाय उसे और प्रदूषित कर दिया है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 10 अक्टूबर को एक बड़ा ऐलान किया। उन्होंने 18 अक्टूबर 2026 को 'चलो यमुना मेगा क्लीनलीनेस ड्राइव' चलाने की घोषणा की है। साथ ही, मुख्यमंत्री ने साल 2028 तक नदी को पूरी तरह साफ करने के लिए चार चरणों वाली एक विशेष रणनीति का प्रस्ताव भी रखा है।
दूसरी ओर, अदालती हस्तक्षेप के बाद अब नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (NMCG) भी इस मामले में सक्रिय हुआ है। हाई कोर्ट ने NMCG को निर्देश दिया है कि वह दिल्ली जल बोर्ड द्वारा नए विकेंद्रीकृत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) लगाने के प्रस्तावों की समीक्षा करे, ताकि शहर का गंदा पानी सीधे नदी में मिलने से रोका जा सके। वजीराबाद, निजामुद्दीन ब्रिज और असगरपुर जैसे इलाकों में भी पानी की गुणवत्ता लगातार गिर रही है, जो दिल्लीवासियों के स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है।