दिल्ली के लिए यमुना के पुराने बाढ़ के मैदान क्यों हैं जरूरी, नई इंटरनेशनल स्टडी में खुलासा

दिल्ली के पीने के पानी की सप्लाई के लिए यमुना नदी के पुराने बाढ़ के मैदान नेचुरल वॉटर प्यूरीफायर के रूप में काम करते हैं। 2 अगस्त 2026 को जारी एक इंटरनेशनल साइंटिफिक स्टडी के अनुसार, जब नदी का पानी रेत, सिल्ट, मिट्टी और बजरी की भूमिगत परतों से रिसता है, तो यह हानिकारक केमिकल और माइक्रो-पॉल्यूटेंट्स को काफी हद तक कम कर देता है। इससे पानी की क्वालिटी में सुधार होता है और पीने योग्य पानी के लिए प्यूरीफायर की प्रभावशीलता बढ़ती है।
* यमुना के बाढ़ के मैदान पानी को नेचुरल रूप से साफ करते हैं।
* पिछले दो सौ वर्षों में दिल्ली में यमुना का दायरा 68% तक सिकुड़ गया है।
* मास्टर प्लान के तहत 'O Zone' घोषित बाढ़ क्षेत्र में 91 अनधिकृत कॉलोनियां मौजूद हैं।
* दिल्ली हाईकोर्ट ने अवैध कब्जे हटाने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।
यमुना के बाढ़ के मैदानों का सिकुड़ना और संकट
दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) और IISER भोपाल के 1 अगस्त 2026 को अपडेट किए गए एक ज्वॉइंट रिसर्च से एक चिंताजनक ट्रेंड सामने आया है। पिछले दो सौ वर्षों में दिल्ली में यमुना का हिस्सा लगभग 68% तक सिकुड़ गया है और इसका लगभग एक तिहाई बाढ़ का मैदान पूरी तरह से नष्ट हो चुका है। अनियंत्रित शहरीकरण, तटबंध निर्माण और बैराज के कारण ग्राउंडवाटर रिचार्ज कम हो रहा है, जिससे दिल्ली का पानी का संकट और बढ़ गया है।
अनधिकृत कॉलोनियां और कानूनी कार्रवाई
आधिकारिक तौर पर, वज़ीराबाद से ओखला तक दिल्ली का यमुना बाढ़ का मैदान लगभग 9,700 हेक्टेयर (97 वर्ग किलोमीटर) में फैला हुआ है। इसे मास्टर प्लान के तहत 'O Zone' के रूप में नामित किया गया है, जो बाढ़ नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण के लिए किसी भी तरह के स्थायी निर्माण पर पूरी तरह रोक लगाता है। हालांकि, इस संरक्षित क्षेत्र में वर्तमान में 91 अनधिकृत कॉलोनियां मौजूद हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने 3 जनवरी 2026 के एक आदेश सहित कड़े निर्देश जारी किए हैं, जिसमें दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी को 10 जनवरी 2026 तक सभी अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया गया है, और वहां किसी भी तरह की बसाहट, धार्मिक सभा या व्यावसायिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया गया है।