यमुना किनारे 99 करोड़ की कंक्रीट दीवार बनाएगी दिल्ली सरकार, विशेषज्ञों ने जताया विरोध

दिल्ली सरकार यमुना किनारे 99 करोड़ की RCC दीवार बनाएगी, लेकिन विशेषज्ञों ने इसे नदी को 'कैद' करने वाला कदम बताया है।

Kittu Kumari2 November 20262 min read0 viewsDelhi Local
यमुना किनारे 99 करोड़ की कंक्रीट दीवार बनाएगी दिल्ली सरकार, विशेषज्ञों ने जताया विरोध

दिल्ली सरकार ने यमुना नदी के किनारों पर 4.7 किलोमीटर लंबी रिइन्फोर्सड सीमेंट कंक्रीट (RCC) की दीवार बनाने की योजना को मंजूरी दे दी है। इस पूरी परियोजना पर करीब 99 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह कदम शहर के निचले इलाकों और बुनियादी ढांचे को मानसून के दौरान आने वाली बाढ़ से बचाने के लिए उठाया गया है। सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण मंत्री परवेश वर्मा की अध्यक्षता में हुई बाढ़ नियंत्रण बोर्ड की 40वीं बैठक में इस योजना को अंतिम हरी झंडी दी गई।

यह दीवार मैगजीन रोड ड्रेन और पुराने रेलवे ब्रिज के बीच बनाई जाएगी, जिसकी ऊंचाई लगभग छह से सात फीट होगी। दरअसल, यह प्रोजेक्ट 622 करोड़ रुपये के एक बड़े बाढ़ नियंत्रण और ड्रेनेज मैनेजमेंट पैकेज का हिस्सा है, जिसे अक्टूबर 2026 के अंत में औपचारिक मंजूरी मिली। सरकार का मानना है कि इस दीवार से रिहायशी इलाकों में पानी घुसने की समस्या खत्म होगी।

विशेषज्ञों ने बताया नदी को 'कैद' करने वाला कदम

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भले ही सरकार इसे सुरक्षा कवच मान रही हो, लेकिन पर्यावरण विशेषज्ञों और शहरी योजनाकारों ने इस प्रस्ताव पर गंभीर सवाल उठाए हैं। 'साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम, रिवर्स एंड पीपल' (SANDRP) के भीम सिंह रावत और यमुना सत्याग्रह के कार्यकर्ता दीवान सिंह का कहना है कि इस तरह की दीवार नदी को प्रभावी रूप से 'कैद' कर देगी। उनका तर्क है कि इससे नदी का प्राकृतिक बहाव बाधित होगा और बाढ़ का खतरा निचले इलाकों की तरफ शिफ्ट हो जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार बाढ़ के असली कारणों, जैसे कि रिवरबेड का क्षरण, नदी के डूब क्षेत्र (floodplain) पर अतिक्रमण और नदी की घटती क्षमता पर ध्यान देने के बजाय केवल ऊपरी लक्षणों का इलाज कर रही है।

इतना ही नहीं, कुछ सरकारी अधिकारियों ने भी गुप्त रूप से इस संरचना के जोखिमों की ओर इशारा किया है। उनका कहना है कि पहले से ही संकुचित नदी चैनल में ऐसी दीवारें बनाने से दबाव असमान हो सकता है, जिससे दीवार के ढहने का खतरा बना रहेगा। विशेषज्ञों ने मांग की है कि जब तक विस्तृत टोपोग्राफिक और बाथिमेट्रिक सर्वे नहीं हो जाते, तब तक निर्माण कार्य को तुरंत रोका जाए और बाढ़ प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक तरीकों को अपनाया जाए।

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