यमुना को साफ रखने के लिए पूरे दिल्ली को आना होगा साथ: टास्क फोर्स की अपील

राजधानी की जीवनरेखा कही जाने वाली यमुना नदी को प्रदूषण मुक्त करना अब केवल सरकारी विभागों या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं रह गई है। यमुना टास्क फोर्स ने साफ तौर पर कहा है कि जब तक दिल्ली के आम नागरिक इस मुहिम से नहीं जुड़ेंगे, तब तक नदी की सूरत बदलना मुश्किल है। रविवार को आयोजित विभिन्न सफाई अभियानों के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि आने वाली पीढ़ियों के लिए हमें एक स्वच्छ नदी छोड़नी होगी, न कि गंदगी का ढेर।
यमुना टास्क फोर्स के सूबेदार रतन सिंह ने इस अभियान की गंभीरता को समझाते हुए बताया कि टास्क फोर्स रोजाना अलग-अलग एनजीओ (NGOs) के साथ मिलकर सफाई कार्य में जुटा हुआ है। उन्होंने कहा कि टीम केवल कचरा साफ नहीं कर रही, बल्कि स्कूलों, कॉलेजों और बाजारों में जाकर लोगों को जागरूक भी कर रही है। सूबेदार सिंह ने लोगों से भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि जिस तरह हम अपने घरों को साफ रखते हैं, वैसी ही श्रद्धा और जिम्मेदारी हमें 'माता यमुना' के प्रति भी दिखानी चाहिए।
राजनीतिक दिग्गजों ने भी संभाला मोर्चा
यमुना को स्वच्छ बनाने के इस अभियान में राजनीतिक स्तर पर भी काफी सक्रियता देखी गई। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने गांधी नगर पुश्ता (यमुना खादर) में सफाई अभियान में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार ने यमुना की सफाई के लिए एक व्यापक योजना तैयार की है, जिस पर अब काम चल रहा है। मल्होत्रा ने पिछली सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा दिए गए लगभग 2,900 करोड़ रुपये का सही इस्तेमाल नहीं किया गया और केवल राजनीति की गई।
सफाई अभियान का दायरा केवल एक जगह तक सीमित नहीं था। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पीडब्ल्यूडी मंत्री परवेश वर्मा ने आईटीओ के पास हाथी घाट पर सफाई अभियान चलाया। वहीं, मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा पुराने रेलवे ब्रिज पर और भाजपा सांसद बंसुरी स्वराज राम घाट पर सफाई अभियान में शामिल हुईं। इन सभी प्रयासों का मुख्य उद्देश्य जनता को यह संदेश देना है कि यमुना की स्वच्छता में हर व्यक्ति का योगदान अनिवार्य है।