यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क: शोर-शराबे से दूर प्रकृति की गोद में बिताएं अपनी सर्दियां

उत्तर दिल्ली का यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क सर्दियों में वन्यजीवों और शांति का केंद्र बना है। जानिए इस इकोसिस्टम की खासियत।

Kittu Kumari1 November 20262 min read0 viewsDelhi Local
यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क: शोर-शराबे से दूर प्रकृति की गोद में बिताएं अपनी सर्दियां

राजधानी दिल्ली में जैसे ही सर्दियों की दस्तक हुई है, शहर की भागदौड़ से दूर एक ऐसी जगह है जो आपको सुकून और कुदरत के करीब ले जाएगी। उत्तर दिल्ली में स्थित यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क इन दिनों प्रकृति प्रेमियों के लिए एक बेहतरीन ठिकाना बना हुआ है। पर्यावरण वैज्ञानिक फैयाज खुदसर ने दिल्लीवासियों से इस पार्क में आने की अपील की है, ताकि वे यहाँ के आत्मनिर्भर और फलते-फूलते इकोसिस्टम को करीब से देख सकें।

वजीराबाद के शोर और भीड़भाड़ वाले इलाके के बीच बसा यह 457 एकड़ में फैला पार्क किसी जादुई दुनिया से कम नहीं है। यहाँ की शांति और हरियाली शहर के प्रदूषण के बीच एक राहत की तरह है। इस पार्क में आपको ब्लू पैंसी तितली, ग्रेट कॉर्मोरेंट और स्नेकबर्ड जैसे दुर्लभ वन्यजीव देखने को मिल सकते हैं, जो इसे पक्षी प्रेमियों और फोटोग्राफर्स के लिए खास बनाते हैं।

वेटलैंड्स का महत्व और पार्क का सफर

DelhiBreakings की हर खबर सबसे पहलेJoin Channel

पार्क के प्रभारी वैज्ञानिक फैयाज खुदसर ने यहाँ के वेटलैंड्स (आर्द्रभूमि) की अहमियत समझाते हुए एक दिलचस्प तुलना की। उन्होंने कहा कि जिस तरह शरीर के लिए किडनी काम करती है, ठीक वैसे ही नदियों के लिए वेटलैंड्स का काम होता है; ये पानी से जहरीले तत्वों को बाहर निकालकर उसे साफ करते हैं।

इस अद्भुत बदलाव की कहानी साल 2002 में शुरू हुई थी। पारिस्थितिकी विज्ञानी आर.सी. बहुगुणा की सोच और तत्कालीन उपराज्यपाल विजय कपूर के समर्थन से इस प्रोजेक्ट की नींव रखी गई। जिस जमीन पर यह पार्क है, वह कभी बेहद खराब, क्षारीय और लवणीय थी, जिसे वैज्ञानिक प्रयासों से एक समृद्ध आवास में बदला गया। वर्तमान में दिल्ली विश्वविद्यालय नोडल अथॉरिटी के रूप में इसे फंड मुहैया करा रहा है, जबकि CEMDE वैज्ञानिक विशेषज्ञता दे रहा है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने भी जमीन आवंटन और अनुदान के जरिए इसमें बड़ी भूमिका निभाई है।

हालांकि, नवंबर 2026 तक आते-आते इस पार्क के भविष्य को लेकर कुछ चर्चाएं तेज हो गई हैं। विशेषज्ञ अब इस बात पर बहस कर रहे हैं कि रिवरफ्रंट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स का यहाँ की जैव विविधता पर क्या असर पड़ेगा और यमुना के बाढ़ क्षेत्र में जोखिमों को कैसे संभाला जाएगा। वहीं, पर्यटन के नजरिए से यहाँ कुछ नया भी हो रहा है। सोनिया विहार और जगतपुर के बीच 'नमो यमुना रिवर सफारी' क्रूज सेवा के ट्रायल चल रहे हैं, जिसके नवंबर 2026 के पहले हफ्ते में औपचारिक रूप से शुरू होने की उम्मीद है।

Share:

Comments

Leave a comment