लेखकों की CM से मांग: विवादित धार्मिक कार्यक्रम का आमंत्रण देने वाले UHS VC को तुरंत करें सस्पेंड

डॉल्फिन हॉर्टिकल्चरल यूनिवर्सिटी (UHS), बागलकोट के वाइस-चांसलर (VC) प्रो. विष्णुवर्धन द्वारा एक धार्मिक समारोह का आधिकारिक आमंत्रण जारी किए जाने के बाद से बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। देश के जाने-माने लेखकों और शिक्षाविदों के एक समूह ने मुख्यमंत्री सिद्दारमैया को पत्र लिखकर VC को सस्पेंड करने की मांग की है। इस समूह में कुम वीरभद्रप्पा, मुदनाकुडु चिन्नस्वामी, बसवराज सुलिभावी, डॉ. एचएस अनुपमा, केपी सुरेश और डेवलपमेंटल एजुकेशनिस्ट निरंजनाराध्य वीपी जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं।
संवैधानिक मूल्यों के उल्लंघन का आरोप
लेखक समूह ने वाइस-चांसलर के इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि यूनिवर्सिटी के आधिकारिक लेटरहेड का इस्तेमाल करके धार्मिक कार्यक्रम का आमंत्रण देना भारत के सेक्युलर संवैधानिक मूल्यों का उल्लंघन है। उनका कहना है कि इससे शैक्षणिक संस्थानों में अपेक्षित वैज्ञानिक सोच (scientific temper) को ठेस पहुंची है। लेखकों ने मुख्यमंत्री से यह भी मांग की है कि ऐसे कड़े निर्देश जारी किए जाएं ताकि भविष्य में शैक्षणिक संस्थानों के नाम पर या सरकारी इमारतों के भीतर इस तरह के धार्मिक आयोजन न हो सकें।
यूनिवर्सिटी को बताया ज्ञान का केंद्र
निरंजनाराध्य वीपी ने इस बात पर जोर दिया कि यूनिवर्सिटी के लेटरहेड, वीसी के हस्ताक्षर और पदनाम का उपयोग करके धार्मिक कार्यक्रम का प्रचार करना 'आधिकारिक आमंत्रण' है जो आपत्तिजनक और निंदनीय है। लेखक कुम वीरभद्रप्पा ने कहा कि यूनिवर्सिटी ज्ञान के केंद्र होते हैं जो जाति, धर्म और व्यक्तिगत मान्यताओं से ऊपर होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की गतिविधियां अप्रत्यक्ष रूप से कर्मचारियों और छात्रों पर इसमें शामिल होने का दबाव बना सकती हैं।
दलित और प्रगतिशील संगठनों का विरोध
प्रगतिशील और दलित संगठनों ( activists अनिल होसमानी, श्यामराव मदार और शिवानंद तमनवर सहित) ने भी इस बात पर चिंता जताई है कि इस तरह के आधिकारिक आचरण से अंधविश्वास को बढ़ावा मिलता है और वैज्ञानिक मूल्यों को नुकसान पहुंचता है। इन संगठनों ने संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के लिए कड़े कदम उठाने की वकालत की है।