दिल्ली: पुलिस बर्बरता और चुनावी गड़बड़ियों के खिलाफ सड़कों पर उतरीं महिलाएं

देश की राजधानी दिल्ली में शनिवार को उस समय माहौल गरमा गया जब बड़ी संख्या में महिलाओं ने पुलिस मुख्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। यह विरोध प्रदर्शन दिल्ली पुलिस द्वारा महिला, ट्रांसजेंडर और नॉन-बाइनरी प्रदर्शनकारियों के साथ की गई कथित बर्बरता के खिलाफ था। प्रदर्शनकारियों का यह मार्च गुरुद्वारा बंगला साहिब के पास से शुरू हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य पुलिस प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपना और व्यवस्थागत यौन हिंसा के खिलाफ जवाबदेही तय करना था।
प्रदर्शन में शामिल ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक विमेंस एसोसिएशन (AIDWA) और नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन विमेन (NFIW) जैसे संगठनों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि हिरासत केंद्रों और बसों के भीतर पुरुष पुलिस अधिकारियों ने महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न, गलत तरीके से छूने और शारीरिक हिंसा जैसी हरकतें की हैं। सबसे चौंकाने वाला आरोप एक एसीपी (ACP) पर है, जिन पर एक युवा महिला पत्रकार के साथ अभद्र व्यवहार करने का आरोप है। बताया जा रहा है कि जब उस पत्रकार ने इसकी शिकायत करनी चाही, तो उल्टा उनके खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कर ली गई। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए 15 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने भी इन आरोपों को "बेहद गंभीर" करार दिया था।
राजनीतिक घमासान और पुलिस की कार्रवाई
प्रदर्शन के दौरान एक प्रतिनिधिमंडल ने एडिशनल डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस जगदेव सिंह से मुलाकात की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने चुनावी अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी दोहराई। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने इस विरोध प्रदर्शन को गैरकानूनी बताते हुए कई प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत पांच से अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर रोक थी, जिसका उल्लंघन किया गया।
इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे असहमति की आवाज को दबाने की साजिश बताया और आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों के कपड़े खींचकर उनके साथ मारपीट की। वहीं, सीपीआई नेता एनी राजा ने केंद्र सरकार पर राजनीतिक विरोध को कुचलने के लिए यौन हिंसा को हथियार बनाने का आरोप लगाते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की।
महिला अधिकार संगठनों ने सरकार और पुलिस के इस रवैये को "स्त्री-द्वेषी प्रयास" करार दिया है, जिसका मकसद महिलाओं को सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन से बाहर धकेलना है। हालांकि एआईएसए (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा को शनिवार सुबह रिहा कर दिया गया, लेकिन सीजेपी (CJP) संस्थापक अभिजीत दिपके के खिलाफ निवारक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। फिलहाल, यह मामला छात्र समूहों, नारीवादी संगठनों और केंद्र सरकार के बीच टकराव का एक बड़ा केंद्र बन गया है।