पुलिस बर्बरता के खिलाफ सड़क पर उतरीं महिलाएं, दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक निकाला मार्च

राजधानी दिल्ली में शनिवार को उस वक्त माहौल गरमा गया जब कई महिला संगठनों ने एकजुट होकर दिल्ली पुलिस मुख्यालय की ओर एक विशाल विरोध मार्च निकाला। यह प्रदर्शन हाल के दिनों में हुए उन प्रदर्शनों के दौरान महिलाओं के साथ हुई कथित यौन हिंसा और पुलिस बर्बरता के खिलाफ था, जो मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) की प्रक्रिया को लेकर किए गए थे।
इस विरोध प्रदर्शन में ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक विमेंस एसोसिएशन (AIDWA), नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन विमेन (NFIW), ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव विमेंस एसोसिएशन (AIPWA) और ऑल इंडिया फेमिनिस्ट अलायंस (ALIFA) जैसे प्रमुख संगठन शामिल हुए। इनके अलावा ऑल इंडिया महिला सांस्कृतिक संगठन (AIMSS) और अन्य प्रगतिशील महिला समूहों ने भी इस मार्च में हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए सुरक्षाकर्मियों ने महिलाओं के साथ शारीरिक और यौन हिंसा का सहारा लिया।
गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग और गंभीर आरोप
प्रदर्शन के दौरान सीपीआई नेता एनी राजा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र सरकार असहमति को दबाने के लिए यौन उत्पीड़न को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने सीधे तौर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की और दावा किया कि उनकी जानकारी या आदेश के बिना ऐसी घटनाएं संभव नहीं हैं। एनी राजा ने स्पष्ट किया कि यह विरोध केवल हिंसा के खिलाफ नहीं, बल्कि चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया के विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग से भी जुड़ा है।
प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली पुलिस को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें सुरक्षाकर्मियों द्वारा की गई कथित हिंसा के लिए जवाबदेही तय करने की मांग की गई। एडिशनल डीसीपी के अधिकारियों के साथ हुई बातचीत के बाद, एनी राजा को आश्वासन मिला कि अगले दो दिनों के भीतर संगठनों के प्रतिनिधियों की दिल्ली पुलिस कमिश्नर के साथ बैठक कराई जाएगी।
बता दें कि 2 अक्टूबर के बाद से हिंसा की कई खबरें सामने आई हैं। एक महिला पत्रकार ने आरोप लगाया कि एसीपी रैंक के एक अधिकारी ने उनके साथ अभद्रता की, लेकिन जब उन्होंने शिकायत करने की कोशिश की, तो उल्टा उनके खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कर ली गई। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने तीन पत्रकारों की शिकायतों को क्राइम ब्रांच में ट्रांसफर किया है, लेकिन साथ ही 16 अक्टूबर को निषेधाज्ञा के उल्लंघन के आरोप में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कई मामले दर्ज किए हैं।
इस पूरे विवाद ने अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींचा है। अमेरिका के छह सांसदों ने विदेश मंत्री मार्को रूबियो से आग्रह किया है कि वे भारतीय अधिकारियों के सामने अत्यधिक बल प्रयोग और चुनावी सूचियों से करोड़ों मतदाताओं को हटाने के मुद्दे पर चिंता जताएं।