महिला पर भी लग सकता है गैंगरेप का आरोप, दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला

Kittu Kumari15 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
महिला पर भी लग सकता है गैंगरेप का आरोप, दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण फैसले में यह स्पष्ट किया है कि सामूहिक बलात्कार (गैंगरेप) के मामले में केवल पुरुषों को ही नहीं, बल्कि महिलाओं को भी आरोपी बनाया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि यदि कोई महिला इस अपराध को अंजाम देने की साझा मंशा (Common Intention) रखती है, तो उस पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376D और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 70 के तहत गैंगरेप का मामला चलाया जा सकता है।

यह मामला तब सामने आया जब एक नाबालिग लड़की की माँ ने इस बात को चुनौती दी थी कि एक महिला पर गैंगरेप का आरोप कैसे लगाया जा सकता है। पीड़िता का आरोप था कि उसकी माँ ने उसे धमकी दी और दिसंबर 2023 से जुलाई 2024 के बीच एक अन्य आरोपी के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किया। पीड़िता के मुताबिक, यौन शोषण की इन घटनाओं के दौरान उसकी माँ कमरे में ही मौजूद रहती थी।

कानून में 'व्यक्तियों' शब्द का व्यापक अर्थ

DelhiBreakings की हर खबर सबसे पहलेJoin Channel

जस्टिस अनुप जयराम भाम्भानी ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि कानून में इस्तेमाल किया गया शब्द 'व्यक्तियों' (Persons) केवल पुरुषों के समूह तक सीमित नहीं है। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि जो व्यक्ति बलात्कार की साजिश में शामिल होता है या साझा इरादे के साथ काम करता है, वह गैंगरेप के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, भले ही उसने शारीरिक रूप से उस कृत्य को अंजाम न दिया हो।

कोर्ट ने अपने फैसले में कुछ अहम बिंदुओं को साफ किया:

  • साझा मंशा: गैंगरेप के अपराध में यह जरूरी नहीं है कि हर आरोपी ने शारीरिक रूप से बलात्कार किया हो; अगर इरादा साझा था, तो वह दोषी माना जाएगा।
  • कानूनी परिभाषा: 2013 के संशोधन के बाद गैंगरेप एक अलग और गंभीर अपराध बन गया है, जिसे अब BNS की धारा 70 में रखा गया है।
  • स्पष्टीकरण: कोर्ट ने यह साफ किया कि वह इस बात पर राय नहीं दे रहा है कि क्या कोई महिला अकेले बलात्कार कर सकती है, बल्कि यह फैसला केवल इस बात पर है कि क्या महिला को गैंगरेप के समूह का हिस्सा माना जा सकता है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कोई महिला अकेले अपने आप में गैंगरेप का मामला नहीं चला सकती, क्योंकि इसके लिए एक समूह का होना जरूरी है। हालांकि, अगर वह ऐसे समूह का हिस्सा है या उस अपराध में मदद करती है, तो वह कानून की नजर में बराबर की अपराधी होगी।

Share:

Comments

Leave a comment