भारतीय शहरों में वन्यजीव अनुकूल शहरी नियोजन की जरूरत, नेहा सिन्हा ने की अपील

Kittu Kumari12 October 20262 min read0 viewsNational
भारतीय शहरों में वन्यजीव अनुकूल शहरी नियोजन की जरूरत, नेहा सिन्हा ने की अपील

संरक्षण जीवविज्ञानी और लेखिका नेहा सिन्हा ने भारतीय शहरों के विकास के तरीके पर एक गंभीर सवाल उठाया है। उन्होंने जोर देकर कहा है कि शहरों का निर्माण केवल इंसानों के लिए नहीं होना चाहिए, बल्कि इनमें वन्यजीवों के लिए भी जगह होनी चाहिए। नेहा सिन्हा का मानना है कि जैसे-जैसे हमारे शहर फैल रहे हैं, शहरी नियोजन (अर्बन प्लानिंग) में वन्यजीव संरक्षण को एक बुनियादी हिस्से के रूप में शामिल करना अनिवार्य हो गया है, ताकि प्रकृति और इंसान एक साथ सह-अस्तित्व में रह सकें।

WWF इंडिया से जुड़ी और 'वाइल्ड कैपिटल: डिस्कवरिंग नेचर इन दिल्ली' की लेखिका नेहा सिन्हा का कहना है कि शहर के निवासी अपने आसपास की प्रजातियों के प्रति अधिक जागरूक होकर बेहतर शहरी वातावरण बनाने में मदद कर सकते हैं। उन्होंने दिल्ली में पाए जाने वाले 'ग्रीन पिजन्स' (हरे कबूतर) का उदाहरण देते हुए बताया कि जब हम ऐसी अनदेखी प्रजातियों को पहचानना शुरू करते हैं, तभी हम उनके लिए एक सुरक्षित और स्वागत योग्य आवास बनाने की दिशा में पहला कदम बढ़ाते हैं।

शहरी जैव विविधता को बचाने के उपाय

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शहरी परिवेश में जैव विविधता को बढ़ावा देने के लिए सिन्हा ने कुछ सरल लेकिन प्रभावी सुझाव दिए हैं। उन्होंने लोगों को स्थानीय पक्षियों की आहार संबंधी जरूरतों को समझने और उनके लिए उपयुक्त आश्रय व वनस्पति उपलब्ध कराने के लिए प्रोत्साहित किया। उनका तर्क है कि शहर के भीतर मौजूद हरित क्षेत्र, आर्द्रभूमि (वेटलैंड्स), जंगल और जैव विविधता पार्क न केवल जानवरों के लिए जरूरी हैं, बल्कि ये शहरी निवासियों को भी शहर की भागदौड़ और तनाव से राहत दिलाने में मदद करते हैं। उनके अनुसार, प्रकृति को शहरी अनुभव से अलग नहीं देखा जाना चाहिए।

वन्यजीवों के संरक्षण की दिशा में राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रयास जारी हैं। अगस्त 2026 में एक संसदीय परामर्श समिति की बैठक में मानव-वन्यजीव संघर्ष पर चर्चा हुई, जिसके बाद 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन ह्यूमन-वाइल्डलाइफ कॉन्फ्लिक्ट' और एक नेशनल पोर्टल की स्थापना की घोषणा की गई। साथ ही, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आवास बहाली, मृदा संरक्षण और जल स्रोतों के निर्माण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान कर रहा है।

नेहा सिन्हा को उम्मीद है कि दिल्ली में पक्षियों की जो विविधता देखने को मिलती है, वह भारत के अन्य शहरों के लिए एक मॉडल बन सकती है, ताकि वे भी अपने स्थानीय वन्यजीवों को बचाने के लिए इसी तरह के कदम उठा सकें।

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