West Asia War से Noida-Gurgaon Real Estate में देरी और लागत बढ़ी, सरकार ने RERA Deadlines बढ़ाई

वेस्ट एशिया में चल रहे युद्ध का असर नोएडा और गुड़गांव के रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स पर पड़ रहा है, जिससे कंस्ट्रक्शन कॉस्ट (Construction Cost) बढ़ गई है और प्रोजेक्ट्स में देरी हो रही है। इस स्थिति को देखते हुए केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) ने राज्य रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरणों (RERAs) को योग्य प्रोजेक्ट्स के लिए चार महीने की एक्सटेंशन (Extension) देने की सलाह दी है।
- वेस्ट एशिया के हालात को 'युद्ध' घोषित किए जाने के बाद RERA एक्ट के तहत फोर्स majeure क्लॉज लागू किया गया है।
- यह एक्सटेंशन 28 फरवरी 2026 या उसके बाद की ओरिजिनल, संशोधित या बढ़ाई गई पूरी होने की तारीख वाले प्रोजेक्ट्स पर लागू होगा।
- MoHUA ने राज्य RERA को अलग-अलग डेवलपर्स के आवेदन मांगने के बजाय एक सामान्य आदेश जारी करने का सुझाव दिया है।
- इस निर्देश से उत्तर प्रदेश में 1,199 प्रोजेक्ट्स को फायदा मिलने की उम्मीद है, जिसमें नोएडा के 301 और गाजियाबाद के 148 प्रोजेक्ट्स शामिल हैं (Source)।
रियल एस्टेट बॉडीज और डेवलपर्स ने किया स्वागत
CREDAI और NAREDCO जैसे रियल एस्टेट संगठनों ने इस एक्सटेंशन का स्वागत किया है और कहा है कि इससे डेवलपर्स को सप्लाई चेन की रुकावटों और बढ़ती इनपुट कॉस्ट (Input Cost) को मैनेज करने में मदद मिलेगी। RG ग्रुप के हिमांशु गर्ग जैसे डेवलपर्स ने कहा कि इस राहत से क्वालिटी से समझौता किए बिना प्रोजेक्ट्स पूरे होंगे और वित्तीय दबाव कम होगा। इस संघर्ष के कारण सप्लाई चेन में भारी रुकावट आई है, जिससे मटेरियल के दाम बढ़ गए हैं। उदाहरण के लिए, कुछ बाजारों में सीमेंट की कीमतें लगभग ₹240 से बढ़कर ₹300 प्रति बैग और स्टील की कीमतें ₹50,000 से बढ़कर ₹70,000 प्रति टन हो गई हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और ग्लोबल शिपिंग खर्च बढ़ने के कारण लॉजिस्टिक्स और एनर्जी की लागत भी बढ़ गई है, जिससे कंस्ट्रक्शन कॉस्ट और ज्यादा बढ़ गई है।
होमबॉयर्स पर असर और कानूनी स्थिति
डेवलपर्स को राहत मिलने के साथ-साथ इसका मतलब यह भी है कि होमबॉयर्स को कम से कम चार महीने की देरी से पोज़ेशन (Possession) मिल सकता है। कानूनी विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि इस अवधि के दौरान डेवलपर्स को "डिफ़ॉल्ट" नहीं माना जाएगा, जिससे देरी के मुआवजे की समय सीमा कम हो जाएगी, लेकिन इस उपाय का उद्देश्य प्रोजेक्ट्स को पूरी तरह से रुकने से बचाना और खरीदारों को दिवालियापन के जोखिम से बचाना है। हालांकि, यह एडवाइजरी डेवलपर्स को रजिस्टर्ड समझौतों के तहत पहले से बेची गई यूनिट्स की कीमतें बढ़ाने की अनुमति नहीं देती है। जून 2026 की एनारोक (Anarock) की इंडस्ट्री रिपोर्ट के अनुसार, भारत के शीर्ष सात शहरों में 5.4 लाख घर देरी के जोखिम में हैं, जिसमें नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) में विशेष रूप से 39,000 यूनिट्स प्रभावित हैं।