कर्तव्य पथ पर गूंजी समावेशी शिक्षा की आवाज, Walk4Dyslexia 2026 का आयोजन

दिल्ली के कर्तव्य पथ पर Walk4Dyslexia 2026 के जरिए डिस्लेक्सिया के प्रति जागरूकता फैलाई गई। केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने किया उद्घाटन।

Kittu Kumari30 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
कर्तव्य पथ पर गूंजी समावेशी शिक्षा की आवाज, Walk4Dyslexia 2026 का आयोजन

राजधानी दिल्ली के कर्तव्य पथ पर रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को एक खास मुहिम 'Walk4Dyslexia 2026' का आयोजन किया गया। डिस्लेक्सिया जागरूकता माह के तहत आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारत में डिस्लेक्सिया के प्रति नजरिए को बदलना और इसे लेकर समाज में फैली गलतफहमियों को दूर करना था। इस कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय सड़क परिवहन, राजमार्ग और कॉर्पोरेट मामलों के राज्य मंत्री श्री हर्ष मल्होत्रा ने पूर्व सांसद श्री तरुण विजय की मौजूदगी में किया।

कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने एक बेहद महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि डिस्लेक्सिया कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह सीखने का एक अलग और अनोखा तरीका है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अगर समय रहते इसकी पहचान हो जाए, तो प्रभावित बच्चों को सही दिशा दी जा सकती है। मंत्री ने यह भी बताया कि सरकार ने अब डिस्लेक्सिया को आधिकारिक तौर पर दिव्यांगता की सूची में शामिल कर लिया है और सीबीएसई (CBSE) ने भी परीक्षाओं के दौरान ऐसे छात्रों के लिए विशेष प्रावधान किए हैं।

जागरूकता की ओर बढ़ते कदम और बड़ा लक्ष्य

इस वॉक में केवल सरकारी अधिकारी ही नहीं, बल्कि सैकड़ों की संख्या में माता-पिता, शिक्षक, छात्र, नीति निर्माता और युवा लीडर्स शामिल हुए। सभी ने मिलकर उन लोगों को समझने, स्वीकार करने और उनका समर्थन करने की शपथ ली जो डिस्लेक्सिया के साथ जी रहे हैं। पूर्व सांसद तरुण विजय ने इस मुहिम में समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 'सोच फाउंडेशन' की भूमिका की सराहना की।

इस पूरी पहल में ANIDEL, सोच फाउंडेशन और जेकेसी फाउंडेशन (जेके सीमेंट लिमिटेड की परोपकारी शाखा) के प्रोजेक्ट 'ब्रिलिएंटली डिस्लेक्सिक' का बड़ा योगदान रहा। डॉ. राघवपत सिंघानिया और श्रीमती सोनम सिंघानिया द्वारा शुरू किए गए इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में दस लाख लोगों तक पहुंचना है। यह पूरा कार्यक्रम 'दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016' और 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020' के सिद्धांतों पर आधारित है, जो सीखने की अक्षमताओं वाले व्यक्तियों के लिए शुरुआती पहचान और सहायता प्रणाली को अनिवार्य बनाते हैं।

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