विजेंद्र गुप्ता ने युवाओं को दिया संदेश: ऊर्जा को राष्ट्र निर्माण में लगाएं

Kittu Kumari8 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
विजेंद्र गुप्ता ने युवाओं को दिया संदेश: ऊर्जा को राष्ट्र निर्माण में लगाएं

दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने युवाओं से संवाद करते हुए उन्हें यह सीख दी कि केवल जोश और जुनून काफी नहीं है, बल्कि जीवन में सफलता और सार्थक बदलाव के लिए विवेक और अनुशासन का होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि युवाओं की ऊर्जा, नए विचार और बड़ी आकांक्षाएं तभी सार्थक होती हैं जब वे जागरूकता और देश के प्रति जिम्मेदारी की भावना से जुड़ी हों।

यह खास बातचीत गुरुवार को दिल्ली विधानसभा के 'यूथ आउटरीच प्रोग्राम' के तहत हुई। इस कार्यक्रम के जरिए देश के विभिन्न हिस्सों से आए छात्रों को लोकतांत्रिक संस्थाओं के कामकाज और भारत की संसदीय परंपराओं से रूबरू कराया गया। इस मौके पर अहमदाबाद के महात्मा गांधी इंटरनेशनल स्कूल, वडोदरा के नवरचना विद्यानी विद्यालय और दिल्ली यूनिवर्सिटी के खालसा कॉलेज, दयाल सिंह कॉलेज, मोतीलाल नेहरू कॉलेज और रामजस कॉलेज के छात्र मौजूद थे।

अनुशासन और धैर्य से ही मिलेगी मंजिल

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छात्रों को संबोधित करते हुए विजेंद्र गुप्ता ने जोर दिया कि युवाओं में जिज्ञासा और महत्वाकांक्षा कूट-कूट कर भरी होती है, लेकिन इसे धैर्य और समझदारी के साथ संतुलित करना चाहिए। उन्होंने छात्रों को प्रेरित किया कि वे केवल समाज में हो रहे बदलावों के मूकदर्शक न बनें, बल्कि अपनी क्षमताओं का रचनात्मक उपयोग करें और राष्ट्र के विकास में सक्रिय योगदान दें। उन्होंने कहा कि सही समय पर सही और सोच-समझकर लिए गए फैसले ही भविष्य की राह आसान बनाते हैं।

इस शैक्षणिक दौरे के दौरान छात्रों ने दिल्ली विधानसभा परिसर की ऐतिहासिक वास्तुकला और उसके महत्व को करीब से देखा। उन्हें डॉक्यूमेंट्री और प्रेजेंटेशन के जरिए विधानसभा के इतिहास और इससे जुड़े प्रमुख व्यक्तित्वों के बारे में जानकारी दी गई। छात्रों ने मुख्य विधानसभा कक्ष का भी भ्रमण किया, जहां वे जान पाए कि विधायी बहस और लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं असल में कैसे काम करती हैं।

दौरे के अंत में छात्रों को विधानसभा की ऐतिहासिक यात्रा पर आधारित कॉफी टेबल बुक 'एक शताब्दी यात्रा' से भी परिचित कराया गया। इस पूरी पहल का मुख्य उद्देश्य छात्रों को भारत के विधायी संस्थानों के इतिहास और वर्तमान लोकतंत्र की कार्यप्रणाली के बीच के अंतर को समझाना और उन्हें जागरूक नागरिक बनाना था।

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