भाषा राष्ट्र की आत्मा और साहित्य मूल्यों का रक्षक: विजेंद्र गुप्ता

दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने रचयिता साहित्य उत्सव में भाषा और साहित्य को राष्ट्र की पहचान और संस्कृति का आधार बताया।

Kittu Kumari29 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
भाषा राष्ट्र की आत्मा और साहित्य मूल्यों का रक्षक: विजेंद्र गुप्ता

दिल्ली यूनिवर्सिटी में आयोजित दो दिवसीय 'रचयिता साहित्य उत्सव' के उद्घाटन सत्र में दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने भाषा और साहित्य के महत्व पर गहरा प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि किसी भी देश की पहचान केवल उसकी भौगोलिक सीमाओं से नहीं, बल्कि वहां की भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत से होती है। विजेंद्र गुप्ता ने जोर देकर कहा कि भाषा वास्तव में एक राष्ट्र की आत्मा होती है और साहित्य ही वह माध्यम है जो देश के विचारों और मूल्यों को स्थायी बनाता है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए उन्होंने 'भाषा, साहित्य और देश' विषय पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि भाषा केवल बातचीत का जरिया नहीं है, बल्कि यह समाज की चेतना, भावनाओं, परंपराओं और सामूहिक यादों की अभिव्यक्ति है। गुप्ता ने कबीर, सूरदास, मीराबाई और तुलसीदास जैसे महान साहित्यकारों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत की साहित्यिक परंपराओं ने सामाजिक और भौगोलिक सीमाओं को पार कर पूरे देश को एक सांस्कृतिक सूत्र में पिरोया है।

सांस्कृतिक चेतना और आधुनिक प्रयास

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इतिहास का हवाला देते हुए विजेंद्र गुप्ता ने तर्क दिया कि किसी भी सभ्यता को कमजोर करने की कोशिश अक्सर उसकी भाषाई और साहित्यिक परंपराओं पर हमला करके शुरू की जाती है। उन्होंने कहा कि विदेशी शासन के दौरान भी भारतीय भाषाओं ने देश की सांस्कृतिक चेतना को जीवित रखा। उन्होंने जापान, जर्मनी, फ्रांस और इजरायल जैसे देशों का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे भाषा और साहित्य राष्ट्रीय पहचान और बौद्धिक विकास को मजबूती देते हैं।

उन्होंने महात्मा गांधी और भारतेंदु हरिश्चंद्र के विचारों को याद करते हुए कहा कि मातृभाषा में शिक्षा बच्चों के लिए सबसे प्रभावी होती है। साथ ही, उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर, बंकिम चंद्र चट्टोपध्याय और सुब्रमण्य भारती जैसे दिग्गजों के योगदान को सराहा, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान राष्ट्रीय चेतना जगाने का काम किया।

वर्तमान प्रयासों की बात करते हुए उन्होंने बताया कि दिल्ली विधानसभा में हिंदी के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसमें आधिकारिक कार्यों और पत्राचार में इसकी भूमिका बढ़ाई गई है। उन्होंने भारत सरकार के 'भाषिणी' प्लेटफॉर्म का भी जिक्र किया, जो अनुवाद और तकनीक के जरिए भाषाई बाधाओं को दूर कर रहा है। अंत में, उन्होंने युवाओं से अपनी मातृभाषा में पढ़ने, लिखने और सृजन करने का आह्वान किया और 'रचयिता' संस्था द्वारा इस उत्सव के आयोजन की सराहना की।

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