दिल्ली में गरबा इवेंट्स की जांच की मांग, VHP ने कहा- नाइट क्लब न बनें उत्सव

राजधानी दिल्ली में नवरात्रि के दौरान आयोजित हो रहे गरबा कार्यक्रमों को लेकर विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने कड़ा रुख अपनाया है। VHP ने दिल्ली सरकार और स्थानीय पुलिस से इन आयोजनों की गहन जांच करने की मांग की है। संगठन का आरोप है कि आस्था और भक्ति का यह पर्व अब अपनी पारंपरिक जड़ों से दूर होता जा रहा है और कई जगहों पर यह धार्मिक उत्सव के बजाय 'नाइट क्लब' जैसा नजर आ रहा है।
रविवार, 18 अक्टूबर 2026 को संगठन ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को एक औपचारिक पत्र सौंपा। इस पत्र के जरिए VHP ने अपनी गहरी चिंता व्यक्त की कि नवरात्रि का त्यौहार, जो मूल रूप से मां दुर्गा और मां शक्ति की उपासना और भक्ति के लिए समर्पित है, अब केवल पार्टियों और शोर-शराबे तक सीमित होता जा रहा है। संगठन ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वे गरबा के माहौल को नाइट क्लब जैसा बनने नहीं देंगे, क्योंकि यह सांस्कृतिक और धार्मिक मर्यादाओं के खिलाफ है।
प्रवेश के लिए आईडी कार्ड और तिलक की मांग
यह पहली बार नहीं है जब VHP ने इन आयोजनों पर आपत्ति जताई है। इससे पहले 9 अक्टूबर 2026 को भी संगठन ने कुछ सख्त निर्देश जारी किए थे। VHP ने मांग की थी कि गरबा स्थलों पर प्रवेश के समय कड़ी जांच होनी चाहिए, जिसमें पहचान पत्र (ID Card) का सत्यापन अनिवार्य हो। साथ ही, सनातन संस्कृति के प्रतीक के रूप में माथे पर 'तिलक' और कलाई पर 'कलावा' बांधने की बात भी कही गई थी।
दिलचस्प बात यह है कि इसी तरह की मांगें वाराणसी जैसे अन्य शहरों में भी VHP और बजरंग दल द्वारा उठाई गई हैं, जहां उन्होंने आधार कार्ड या अन्य सरकारी पहचान पत्र दिखाने को अनिवार्य करने की अपील की है। दिल्ली में यह मांग नवरात्रि के आठवें दिन सामने आई है, जब शहर भर में बड़े पैमाने पर गरबा और डांडिया कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।