मेटा ने हटाया फडणवीस का वीडियो, VHP ने जताई नाराजगी, मांगी सार्वजनिक माफी
विश्व हिंदू परिषद ने मेटा पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए देवेंद्र फडणवीस के वीडियो को बहाल करने और माफी मांगने की मांग की है।

सोशल मीडिया दिग्गज मेटा एक नए विवाद में फंस गया है। विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने आरोप लगाया है कि फेसबुक और इंस्टाग्राम ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के एक वीडियो को ब्लॉक कर दिया है। यह वीडियो 'वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस' (WHC) के प्रतिनिधियों के स्वागत से जुड़ा था। VHP ने इस कार्रवाई को मनमाना बताते हुए वीडियो को तुरंत बहाल करने और सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की है।
VHP प्रवक्ता विनोद बंसल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए बताया कि वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस ने 26 अक्टूबर को यह वीडियो अपलोड किया था, लेकिन कुछ ही घंटों में मेटा ने इसे हटा दिया। उन्होंने दावा किया कि जब 27 अक्टूबर को इसे दोबारा पोस्ट किया गया, तो उसे फिर से हटा दिया गया। बंसल ने सवाल उठाया कि आखिर किस कानून के उल्लंघन या किस अपराध के आधार पर यह कदम उठाया गया?
कानूनी कार्रवाई की चेतावनी और सरकार से हस्तक्षेप की मांग
विनोद बंसल ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि यदि मेटा अपनी इन 'हिंदू विरोधी' हरकतों से बाज नहीं आया, तो वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस कानूनी रास्ता अपनाने को मजबूर होगी। उन्होंने इस मामले में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय सहित संबंधित अधिकारियों से हस्तक्षेप करने की अपील की है। बंसल के अनुसार, इस मामले की शिकायत केंद्र सरकार, मुंबई पुलिस और दिल्ली पुलिस से भी की गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत में इस तरह की मनमानी नहीं चलेगी और जवाबदेही तय होनी चाहिए।
दूसरी ओर, वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस ने सीधे मेटा को पत्र लिखकर इस कार्रवाई की औपचारिक व्याख्या मांगी है। संगठन ने पारदर्शिता की मांग करते हुए पूछा है कि वीडियो हटाने के पीछे क्या कारण थे और यह सुनिश्चित करने को कहा है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
बता दें कि वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस 2026 का आयोजन 18 से 20 दिसंबर तक मुंबई में किया जाएगा। इस आयोजन में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, देवेंद्र फडणवीस, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव जैसे कई दिग्गज शामिल होंगे। यह कांग्रेस दुनिया भर के हिंदू नेताओं और विचारकों को एक साझा मंच पर लाने की एक पहल है, जो हर चार साल में आयोजित की जाती है।