मनी लॉन्ड्रिंग केस: वाटिका लिमिटेड के प्रमोटर्स की हिरासत 3 दिन और बढ़ी, ED करेगी पूछताछ

गुरुग्राम की एक विशेष PMLA कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ED) को वाटिका लिमिटेड के चेयरमैन अनिल भल्ला और प्रमोटर गौतम भल्ला की हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की अनुमति दे दी है। इन दोनों को 28 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था और पहले उन्हें 3 अक्टूबर तक रिमांड पर भेजा गया था। अब कोर्ट ने एजेंसी को उनकी कस्टडी आगे बढ़ाने की मंजूरी दे दी है।
करीब 154 करोड़ रुपये के गबन का है आरोप
यह पूरा मामला दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दर्ज की गई कई एफआईआर के बाद शुरू हुआ। ईडी का आरोप है कि 'वाटिका इंडिया नेक्स्ट' और 'वाटिका इंडिया नेक्स्ट-2' जैसे प्रोजेक्ट्स के लिए खरीदारों से जुटाए गए करीब 154.36 करोड़ रुपये का गलत इस्तेमाल किया गया। एजेंसी का दावा है कि इस पैसे को प्रोजेक्ट पूरा करने के बजाय अन्य ग्रुप कंपनियों और प्रमोटरों से जुड़ी संस्थाओं में डाइवर्ट कर दिया गया।
जांच में यह बात सामने आई है कि 'वाटिका इंडिया नेक्स्ट-2' में 90 करोड़ रुपये की लागत से खरीदी गई करीब 1.10 लाख वर्ग गज जमीन 14 साल बाद भी ग्राहकों को नहीं सौंपी गई है। वहीं, 'वाटिका इंडिया नेक्स्ट' में भी 140.73 करोड़ रुपये के प्लॉट बकाया हैं। ईडी के मुताबिक, अनिल भल्ला ने बड़े लेनदेन की निगरानी की, जबकि गौतम भल्ला ने समझौतों को लागू करने और जमीन रखने वाली संस्थाओं को नियंत्रित करने में मुख्य भूमिका निभाई। इस मामले में गौरव भल्ला का नाम भी ईसीआईआर (ECIR) में शामिल है।
जांच के दौरान ईडी ने अब तक एक मर्सिडीज-बेंज GLC 300 और करीब 1.55 करोड़ रुपये के गहने जब्त किए हैं। इसके अलावा 3.04 करोड़ रुपये के बैंक खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट्स को भी फ्रीज किया गया है। अलग से, हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी के आदेश पर 80 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान के कारण जिला प्रशासन ने भी कंपनी के बैंक खाते फ्रीज कर दिए हैं।
कोर्ट में सुनवाई के दौरान जज नरेंद्र सूरा ने स्पष्ट किया कि ईडी की यह जिम्मेदारी है कि वह फंड के प्रवाह का पता लगाए और इस अपराध के पीछे के तरीके (Modus Operandi) का खुलासा करे। दूसरी ओर, बचाव पक्ष के वकीलों ने इन आरोपों को मनगढ़ंत बताया है। उनका तर्क है कि यह मामला पुराने व्यावसायिक समझौतों से जुड़ा है और पुलिस ने एक दशक की देरी के बाद एफआईआर दर्ज की है। इस केस में 2024 के एक ट्रांजैक्शन का भी जिक्र है, जिसमें कथित तौर पर बिना सहमति के 150 में से 14 प्लॉट तीसरे पक्ष को बेच दिए गए थे।