वसंत कुंज: हरे क्षेत्र में शॉपिंग सेंटर बनाने पर बवाल, DDA के खिलाफ निवासियों का प्रदर्शन

Kittu Kumari16 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
वसंत कुंज: हरे क्षेत्र में शॉपिंग सेंटर बनाने पर बवाल, DDA के खिलाफ निवासियों का प्रदर्शन

दिल्ली के वसंत कुंज इलाके में दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और स्थानीय निवासियों के बीच टकराव गहरा गया है। नर्मदा, सरस्वती, गंगा और यमुना हाउसिंग सोसायटियों के लोग डीडीए द्वारा दो लोकल शॉपिंग सेंटर्स (LSCs) के निर्माण के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। निवासियों का कहना है कि जिस जमीन पर यह निर्माण होना है, वह वर्तमान में एक हरा-भरा क्षेत्र है, जिसका उपयोग बच्चे, बुजुर्ग और स्थानीय लोग योग व अन्य सामुदायिक गतिविधियों के लिए करते हैं।

नर्मदा-सरस्वती रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) के अध्यक्ष विक्रम गहलोत के नेतृत्व में प्रदर्शन कर रहे लोगों का दावा है कि इस प्रोजेक्ट की वजह से करीब 300 से 400 पेड़ों को नुकसान पहुंच सकता है। निवासियों का आरोप है कि डीडीए मूल स्वीकृत लेआउट से भटक रहा है, जिसमें केवल एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का प्रावधान था। साथ ही, यह शिकायत भी उठाई गई है कि मास्टर प्लान में बदलाव करते समय जनता से उचित परामर्श नहीं किया गया। हालांकि, डीडीए का कहना है कि यह पूरा विकास मूल स्वीकृत योजनाओं के अनुसार ही हो रहा है।

कानूनी लड़ाई और सुप्रीम कोर्ट का रुख

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इस विवाद ने कानूनी मोड़ ले लिया है। 18 अगस्त 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट ने आरडब्ल्यूए की याचिकाओं को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने डीडीए के टेंडर और अलॉटमेंट को सही ठहराते हुए कहा कि किसी जमीन का अस्थायी रूप से मनोरंजन के लिए उपयोग होना, उसके स्वीकृत लैंड यूज (land use) को स्थायी रूप से नहीं बदलता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि शहरी नियोजन के मामलों में न्यायिक समीक्षा का दायरा सीमित होता है।

हाई कोर्ट के फैसले से असंतुष्ट होकर नर्मदा आरडब्ल्यूए ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 30 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने एसोसिएशन को अपनी विशेष अनुमति याचिका (SLP) वापस लेने की अनुमति दी और उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट में समीक्षा याचिका (review petition) दायर करने की छूट दी। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि समीक्षा याचिका का परिणाम प्रतिकूल रहता है, तो निवासी दोबारा सुप्रीम कोर्ट आ सकते हैं।

फिलहाल, वसंत कुंज के निवासी शांतिपूर्ण प्रदर्शन, कैंडल मार्च और demonstrations के जरिए अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। बता दें कि 26 सितंबर 2026 को निवासियों ने साइट पर खुदाई के काम को भी रुकवाया था। आरडब्ल्यूए ने संकेत दिए हैं कि यदि उनकी मांगों पर गौर नहीं किया गया, तो वे भूख हड़ताल जैसे कड़े कदम उठा सकते हैं।

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