राष्ट्रपति भवन में गूंजा वंदे मातरम: हरिहरन के परिवार की चार पीढ़ियों ने पेश की खास संगीत प्रस्तुति
पद्मश्री हरिहरन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को 'द एंथम: वंदे मातरम' विनाइल एल्बम भेंट किया, जिसमें उनकी चार पीढ़ियों ने आवाज दी है।

देशभक्ति की भावना से सराबोर 'वंदे मातरम' गीत ने एक बार फिर राष्ट्रपति भवन में अपनी गूंज बिखेरी है। 26 अक्टूबर को एक बेहद खास मौका आया जब पद्मश्री हरिहरन और श्रीमती आलमेलु मणि ने भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। इस मुलाकात का मुख्य केंद्र वंदे मातरम विनाइल एल्बम था, जिसकी पहली कॉपी राष्ट्रपति महोदया को भेंट की गई। यह एल्बम केवल एक संगीत संग्रह नहीं, बल्कि संगीत और विरासत का एक अनूठा संगम है।
इस अवसर की सबसे खास बात हरिहरन जी के परिवार की चार पीढ़ियों का एक साथ आना था। इस ऐतिहासिक संगीत कृति में हरिहरन जी के साथ उनके बेटे अक्षय हरिहरन और परिवार के सबसे छोटे सदस्यों, आरिया अक्षय और अहान अक्षय ने भी अपनी आवाज दी है। इस भावुक क्षण में श्रीमती ललिता हरिहरन और श्रीमती अमृता भी मौजूद रहीं, जिससे यह आयोजन एक पारिवारिक उत्सव जैसा नजर आया।
विनाइल रिकॉर्ड पर जीवंत हुई आजादी की यादें
राष्ट्रपति भवन में हुई इस मुलाकात के दौरान हरिहरन जी ने इस एल्बम को तैयार करने के सफर के बारे में चर्चा की और राष्ट्रपति के समक्ष 'वंदे मातरम' की जीवंत प्रस्तुति भी दी। सेंटर फॉर ग्रामोफोन एंड एलाइड स्टडीज (CeGRAMS) के श्री अखिलेश झा, जिन्होंने इस एल्बम की परिकल्पना की थी, उन्होंने राष्ट्रपति को इसके ऐतिहासिक महत्व और इसमें शामिल गीतों के बारे में विस्तार से बताया। उनके साथ श्रीमती रश्मिता झा और समनवी डिजिटल मीडिया के श्री साजी पिल्लई भी मौजूद थे।
कार्यक्रम का सबसे यादगार पल वह था जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने खुद टर्नटेबल पर इस विनाइल रिकॉर्ड की पहली कॉपी को सुना। जिस गीत ने आजादी की लड़ाई के दौरान पूरे देश में जोश भर दिया था, उसे आज स्वतंत्र भारत के सर्वोच्च संवैधानिक कार्यालय में चार पीढ़ियों की आवाज में सुनना एक बेहद गहरा और भावनात्मक अनुभव था। यह आयोजन संगीत, यादों और राष्ट्रप्रेम की अटूट भावना का एक सुंदर उत्सव बन गया।