RCOM मनी लॉन्ड्रिंग केस: वैशाली माने के खिलाफ दिल्ली कोर्ट ने जारी किया गैर-जमानती वारंट

दिल्ली की एक विशेष CBI कोर्ट ने रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM) से जुड़े 40,000 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की है। मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को कोर्ट ने मामले की आरोपी वैशाली माने के खिलाफ ओपन-एंडेड गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया। यह आदेश प्रवर्तन निदेशालय (ED) की उस याचिका पर आया है, जिसमें आरोपी की अनुपस्थिति पर चिंता जताई गई थी।
विशेष न्यायाधीश (CBI) अजय गुलाटी ने सुनवाई के दौरान पाया कि वैशाली माने को ईमेल और व्हाट्सएप के जरिए कई बार समन भेजे गए, लेकिन वह जांच में शामिल होने के लिए पेश नहीं हुईं। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि इससे पहले 27 अप्रैल को जारी किए गए वारंट भी बिना किसी सफलता के वापस लौट आए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने आदेश दिया कि यह वारंट तब तक प्रभावी रहेगा जब तक कि इसे लागू नहीं कर दिया जाता या कोर्ट द्वारा रद्द नहीं किया जाता।
विदेश में शरण और जांच की चुनौती
ED की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जोहेब हुसैन ने दलील दी कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक, वैशाली माने 2015 से अमेरिका में रह रही हैं। उनकी मां द्वारा दिए गए बयानों से पता चला है कि बॉन इन्वेस्टमेंट इंक की पूर्व डायरेक्टर रह चुकी वैशाली आखिरी बार 2021 में भारत आई थीं।
बता दें कि ED ने 27 मार्च 2026 को वैशाली माने और RCOM के पूर्व डायरेक्टर पुनीत नरेंद्र गर्ग के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। जहां पुनीत गर्ग जनवरी 2026 में गिरफ्तारी के बाद से न्यायिक हिरासत में हैं, वहीं वैशाली की अनुपस्थिति जांच के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी, जिसमें जांच एजेंसी को वारंट की स्थिति और वैशाली के ठिकाने के बारे में रिपोर्ट देनी होगी।