नई दिल्ली। भारत में शहरी लोगों की जीवनशैली को लेकर एक नई रिपोर्ट सामने आई है। EYVA द्वारा जारी इंडिया वेलनेस इंडेक्स 2026 के अनुसार, देर रात का खाना, लंबे समय तक बैठकर सफर करना, खाने के बाद टहलने की कमी और सोने से पहले कैफीन का सेवन शहरी भारतीयों में खराब सेहत का मुख्य कारण बन रहा है। इस रिपोर्ट में देश भर के 30,000 से अधिक यूजर्स के 35 लाख से ज्यादा डेटा का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 54 प्रतिशत लोगों ने रात 9 बजे के बाद अपना भारी भोजन किया, जिससे उनकी नींद की क्वालिटी खराब हुई और अगले दिन सुबह ब्लड शुगर का स्तर बढ़ा हुआ पाया गया।
लगभग एक तिहाई लोगों में भारी, तला-भुना और नमकीन खाना खाने से वैस्कुलर प्रेशर बढ़ा हुआ देखा गया, और यह समस्या दिल्ली में सबसे ज्यादा थी। इसके अलावा, जिन परिवारों ने एक जैसा खाना खाया, उनमें भी अगले दिन सुबह ग्लूकोज और रिकवरी के स्तर में अंतर देखा गया। हालांकि, खाने के बाद थोड़ी गतिविधि करने वाले लोगों की सेहत पर इसका सकारात्मक असर दिखा। 37 प्रतिशत यूजर्स जिन्होंने खाने के बाद थोड़ी सैर की, उनके
ग्लूकोज के स्तर में 12 से 16 प्रतिशत तक सुधार और बेहतर नींद दर्ज की गई। वहीं, 40 प्रतिशत लोगों ने सोने से 6 घंटे पहले कैफीन का सेवन किया।
रिपोर्ट में क्षेत्रीय आधार पर भी जीवनशैली और सेहत के अंतर को बताया गया है। दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों में स्मॉग के दौरान बाहरी गतिविधियां 30 प्रतिशत तक कम हुईं और मेटाबॉलिक वेलनेस स्कोर में 6 से 9 प्रतिशत की गिरावट आई। मुंबई में 64 प्रतिशत लोगों ने रात 9:30 बजे के बाद अंतिम भोजन किया और 52 प्रतिशत लोग सार्वजनिक परिवहन से सफर करते हैं। बेंगलुरु में 44 प्रतिशत यूजर्स ने लंबे समय तक बैठकर सफर करने की बात कही। हैदराबाद में 64 प्रतिशत कामकाजी पेशेवर रात 10 बजे के बाद अपना खाना खाते हैं।
EYVA के संस्थापक और सीईओ सुनील मडदिकतला ने बताया कि खराब सेहत के लिए कोई एक कारण जिम्मेदार नहीं है, बल्कि कई आदतें मिलकर असर डालती हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि जिन लोगों ने अपनी छोटी आदतों में सुधार किया, उनका वेलनेस स्कोर तीन महीने में 8 से 12 प्रतिशत तक बढ़ गया।