UPI Payment News: आम लोगों के लिए UPI रहेगा पूरी तरह फ्री, सरकार और PCI ने साफ की स्थिति

Kittu Kumari7 August 20263 min read36 viewsNational
UPI Payment News: आम लोगों के लिए UPI रहेगा पूरी तरह फ्री, सरकार और PCI ने साफ की स्थिति

नयी दिल्ली, 7 अगस्त। डिजिटल भुगतान पर शुल्क को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) ने शुक्रवार को स्पष्ट किया है कि आम उपयोगकर्ताओं को यूपीआई भुगतान के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा। लोकसभा से टैक्सेशन एंड अदर लॉज बिल पारित होने के बाद शुरू हुई बहस के बीच सरकार और आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि आम ग्राहकों को डरने की जरूरत नहीं है। इस खबर से जुड़े मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं:

- आम उपयोगकर्ताओं के लिए यूपीआई भुगतान पूरी तरह निःशुल्क रहेगा।

- छोटे दुकानदारों और किराना स्टोरों को भी एमडीआर के रूप में कोई शुल्क नहीं देना पड़ता।

- लोकसभा में टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल-2026 पारित किया गया है।

- वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्थिति साफ की है।

पीसीआई और सरकार का स्पष्टीकरण

पीसीआई ने कहा कि 2016 में अपनी शुरुआत से ही यूपीआई उपभोक्ताओं के लिए पूरी तरह निःशुल्क रहा है और भारत का प्रत्येक नागरिक बिना किसी लेनदेन शुल्क के तुरंत डिजिटल भुगतान करना जारी रख सकता है। इसके साथ ही छोटे दुकानदारों और किराना स्टोरों को भी यूपीआई भुगतान स्वीकार करने पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) के रूप में कोई शुल्क नहीं देना पड़ता, क्योंकि इस समावेशी प्रणाली का मूल उद्देश्य सबसे छोटे व्यवसायों को आसानी से डिजिटल भुगतान से जोड़ना है। यूपीआई शुल्क को लेकर हो रही हालिया चर्चाओं पर पीसीआई ने स्पष्ट किया कि एक नए मंच से शुरू होकर आज यह दुनिया की सबसे बड़ी रियल-टाइम भुगतान प्रणाली बन चुका है। ऐसे में हर महीने होने वाले अरबों सुरक्षित लेन-देन के बुनियादी ढांचे को टिकाऊ बनाए रखने पर विचार किया जा रहा है, ताकि उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों पर कोई असर न पड़े। पिछले लगभग 10 वर्षों में बैंकों, भुगतान कंपनियों, फिनटेक फर्मों, एनपीसीआई और भारतीय रिजर्व बैंक ने मिलकर तकनीक, साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकने और ग्राहक सहायता में भारी निवेश किया है।

नया बिल और एमडीआर नियम

दिल्ली में यूनिफायड पेमेंट इंटरफेस यानि कि यूपीआई से होने वाले भुगतान पर अब शुल्क लगाने का रास्ता साफ होता दिख रहा है, लेकिन इस शुल्क से ट्रांजेक्शन से जुड़ी 71 प्रतिशत राशि मुक्त रह सकती हैं। टैक्स संबंधी नियमों में संशोधन के लिए लाए गए बिल को गुरुवार को लोकसभा से पारित कर दिया गया है। केंद्र सरकार ने टैक्सेशन एंड अदर लॉज बिल पेश किया है, जिसके बाद बिल पारित भी हो चुका है। हालांकि इस बिल में इस बात का कोई जिक्र नहीं है कि यूपीआई से जुड़े किस प्रकार के या कितनी रकम के बाद के ट्रांजेक्शन पर शुल्क लगाए जाएंगे। सरकार ने संसद में टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल-2026 पेश किया है, जिसमें पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट-2007 की धारा 10A में संशोधन का प्रस्ताव है। वर्तमान में इस राष्ट्रीय डिजिटल बुनियादी ढांचे के संचालन, तकनीक, सुरक्षा और नियामकीय अनुपालन का सारा खर्च बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं सहित यूपीआई पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़े संस्थान ही वहन कर रहे हैं। यदि बड़े व्यापारियों पर कहीं मर्चेंट सर्विस चार्ज लागू भी होता है, तो वह व्यापारी और भुगतान सेवा प्रदाता के बीच का व्यावसायिक समझौता होता है, जिसका उपभोक्ताओं पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

विपक्ष के आरोप और राजनीतिक प्रतिक्रिया

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि यह संशोधन उस कानूनी सुरक्षा को हटाता है जिसने अब तक यूपीआई ट्रांजेक्शन को पूरी तरह मुफ्त रखा है। उनका आरोप है कि इससे भविष्य में यूपीआई पर एमडीआर लगाने का रास्ता साफ होगा और इसका अंतिम बोझ आम जनता पर ही पड़ेगा। भारत में रोजाना फल-सब्जी खरीदने से लेकर कैब के किराए तक के लिए करोड़ों लोग यूपीआई का इस्तेमाल करते हैं। विपक्ष के आरोपों पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सफाई दी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विपक्ष के दावों को खारिज करते हुए X पर कहा कि एमडीआर केवल मर्चेंट्स यानि दुकानदारों और व्यापारियों पर लागू होता है, न कि अंतिम उपभोक्ता या ग्राहकों पर। इससे मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल बैंक और फिनटेक कंपनियां अपने इंफ्रास्ट्रक्चर, इनोवेशन और सिक्योरिटी को मजबूत करने में करेंगी, जिसका फायदा अंततः सभी यूपीआई यूजर्स को ही मिलेगा।

Share:

Comments

Leave a comment