उपहार सिनेमा त्रासदी: मुआवजे पर टैक्स छूट को लेकर आयकर विभाग पहुंचा हाई कोर्ट

दिल्ली के चर्चित उपहार सिनेमा अग्निकांड मामले में अब एक नया कानूनी मोड़ आया है। इस त्रासदी के पीड़ितों को दिए गए मुआवजे और कानूनी खर्चों पर टैक्स कटौती (Tax Deduction) के दावे को लेकर आयकर विभाग ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। विभाग ने इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) के एक पुराने फैसले को चुनौती दी है, जिस पर अब हाई कोर्ट ने Ansal Theatre & Clubotels (P) Ltd. को नोटिस जारी किया है।
यह पूरा विवाद अंसल ग्रुप द्वारा असेसमेंट ईयर 2014-15 के लिए किए गए टैक्स दावों से जुड़ा है। कंपनी ने करीब 10.45 करोड़ रुपये की कटौती का दावा किया था, जिसमें 8.81 करोड़ रुपये पीड़ितों के मुआवजे के तौर पर और 1.65 करोड़ रुपये कानूनी व प्रोफेशनल फीस के रूप में खर्च किए गए थे। आयकर विभाग ने इस पूरे दावे को खारिज कर दिया था, क्योंकि विभाग का मानना था कि यह खर्च पूरी तरह से बिजनेस के उद्देश्यों के लिए नहीं किया गया था।
क्या है विवाद की मुख्य वजह?
मामले की गहराई में जाएं तो आयकर विभाग का तर्क है कि इनकम टैक्स एक्ट की धारा 37(1) के तहत केवल वही खर्च कटौती के योग्य होते हैं जो पूरी तरह से व्यापार के लिए किए गए हों। हालांकि, ITAT ने पहले कंपनी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा था कि केवल 25 लाख रुपये के 'दंडात्मक हर्जाने' (Punitive Damages) को छोड़कर बाकी मुआवजे और कानूनी खर्चों पर टैक्स छूट मिलनी चाहिए।
आयकर विभाग अब इस बात को चुनौती दे रहा है कि क्या मुआवजे की राशि और कानूनी लड़ाई पर खर्च किए गए पैसे को 'बिजनेस एक्सपेंडिचर' माना जा सकता है। विभाग का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में टिप्पणी की थी कि लाइसेंसधारी को अपने अवैध कार्यों से होने वाले लाभ से वंचित किया जाना चाहिए।
बता दें कि 13 जून 1997 को दक्षिण दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित उपहार सिनेमा में फिल्म 'बॉर्डर' की स्क्रीनिंग के दौरान भीषण आग लगी थी, जिसमें 59 लोगों की जान चली गई थी और 103 लोग घायल हुए थे। इस घटना के बाद मुआवजे और जिम्मेदारी को लेकर सालों तक कानूनी लड़ाई चली।
हाई कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के लिए अब 5 फरवरी 2027 की तारीख तय की है। यह स्पष्ट कर दें कि यह कानूनी लड़ाई टैक्स कटौती के अधिकार को लेकर है, न कि पीड़ितों को मिलने वाले मुआवजे की राशि पर।