मेरठ में उत्तर प्रदेश खादी उत्सव का आगाज, स्वदेशी उत्पादों की सजी बाजार

मेरठ के जीआईसी ग्राउंड में शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 से उत्तर प्रदेश खादी उत्सव की शानदार शुरुआत हुई है। उत्तर प्रदेश खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा आयोजित यह प्रदर्शनी 25 अक्टूबर तक चलेगी। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण उद्यमियों को एक बड़ा मंच देना और 'हर घर स्वदेशी' अभियान के जरिए भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कदम बढ़ाना है।
इस उत्सव का उद्घाटन राज्यसभा सदस्य डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने किया। उनके साथ मेरठ कैंट विधायक अमित अग्रवाल, शिवलखास विधायक गुलाम मोहम्मद, एमएलसी धर्मेंद्र भारद्वाज और मेयर हरिकान्त आहलूवालिया भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में यूपी खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड के सीईओ शिशिर सिंह, सीडीओ नूपुर गोयल और क्षेत्रीय ग्रामोद्योग अधिकारी मान्या चतुर्वेदी ने भी शिरकत की।
बनारसी सिल्क से लेकर सहारनपुर की लकड़ी तक, सब कुछ एक जगह
इस प्रदर्शनी में देश के अलग-अलग हिस्सों की कला और संस्कृति का संगम देखने को मिल रहा है। यहाँ आने वाले लोग खादी के कपड़ों के साथ-साथ बनारसी सिल्क साड़ियाँ, कश्मीरी शॉल, ड्राई फ्रूट्स और क्रॉकरी की खरीदारी कर सकते हैं। खास तौर पर मुरादाबाद के पीतल के उत्पाद, पश्चिम बंगाल की कांथा कढ़ाई, बनारस के सिल्क उत्पाद, पिलखुआ की बेडशीट्स और सहारनपुर के लकड़ी के हस्तशिल्प आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
इस उत्सव में उत्तर प्रदेश के अलावा महाराष्ट्र और बिहार के खादी संस्थानों ने भी हिस्सा लिया है। कार्यक्रम की खास बात 'गांधी पवेलियन' है, जहाँ महात्मा गांधी की विरासत को याद करते हुए पारंपरिक चरखा प्रदर्शित किया गया है। साथ ही, स्कूली बच्चों ने सांस्कृतिक नृत्य और 'स्वदेशी' विषय पर आधारित एक नाटक पेश कर सबका मन मोह लिया।
त्योहारी सीजन (दुर्गा पूजा, दशहरा, धनतेरस और दिवाली) को देखते हुए इस आयोजन को समयबद्ध तरीके से आयोजित किया गया है। इस दौरान महात्मा गांधी पुरस्कार योजना के तहत बेहतरीन काम करने वाली इकाइयों को सम्मानित भी किया गया। उत्तर प्रदेश सरकार का लक्ष्य अब खादी की ब्रांडिंग को आधुनिक बनाना है ताकि युवा पीढ़ी इससे जुड़े और रोजगार के नए अवसर पैदा हों। सरकार का लक्ष्य इस क्षेत्र के टर्नओवर को 2.51 लाख करोड़ रुपये तक ले जाने का है।