दिल्ली में यमुना नदी की मछलियों में मिले माइक्रोप्लास्टिक्स, चौंकाने वाली रिसर्च आई सामने

Kittu Kumari3 August 20262 min read32 viewsDelhi Local
दिल्ली में यमुना नदी की मछलियों में मिले माइक्रोप्लास्टिक्स, चौंकाने वाली रिसर्च आई सामने

दिल्ली विश्वविद्यालय (University of Delhi) की एक नई रिसर्च में यमुना नदी को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। 3 अगस्त 2026 को सामने आई इस रिपोर्ट के अनुसार, यमुना नदी से पकड़ी गई सभी 12 मछली प्रजातियों में माइक्रोप्लास्टिक्स (microplastics) पाए गए हैं। इस रिसर्च के शुरुआती आंकड़े 11 मई 2026 और 15 जून 2026 को प्रीप्रिंट्स के तौर पर प्रकाशित किए गए थे।

  • यमुना नदी की सभी 12 मछली प्रजातियों में माइक्रोप्लास्टिक्स की पुष्टि।
  • हरियाणा के मुकाबले दिल्ली का हिस्सा सबसे ज्यादा दूषित पाया गया।
  • कुल 220 मछलियों की जांच में 1,678 माइक्रोप्लास्टिक कण मिले।
  • दिल्ली के सोनिया विहार की तिलापिया मछली में सबसे ज्यादा प्रदूषण मिला।
  • मछलियों में मिले माइक्रोप्लास्टिक के आंकड़े

    शोधकर्ताओं ने यमुना नगर, करनाल, सुर घाट और सोनिया विहार जैसे इलाकों से 12 प्रजातियों की 220 मीठे पानी की मछलियों के सैंपल लिए। इस दौरान कुल 1,678 माइक्रोप्लास्टिक कण बरामद किए गए, जो प्रति मछली औसतन 7.6 कण बैठते हैं। इस जांच से यह साफ हो गया कि परीक्षण में शामिल एक भी मछली प्रदूषण से मुक्त नहीं थी।

    दिल्ली का हिस्सा सबसे अधिक प्रभावित

    शोधकर्ताओं ने हरियाणा के ऊपरी इलाकों की तुलना में दिल्ली से गुजरने वाले नदी के हिस्से को सबसे गंभीर रूप से प्रभावित क्षेत्र माना है। इस भारी प्रदूषण के पीछे बिना ट्रीट किया गया सीवेज, म्युनिसिपल अपशिष्ट, कपड़ा उद्योगों का वेस्ट, और अनियंत्रित प्लास्टिक कचरे को मुख्य कारण बताया गया है। इन कणों में 78% से अधिक फाइबर शामिल हैं, जो सिंथेटिक कपड़ों और कपड़ा उद्योगों की ओर इशारा करते हैं। इसके अलावा पारदर्शी (44%), नीला (19.5%) और काला (16.3%) रंग सबसे प्रमुख रहे। खास तौर पर, दिल्ली के सोनिया विहार की तिलापिया (Tilapia) मछली में सबसे ज्यादा प्रति मछली औसतन 21.8 माइक्रोप्लास्टिक कण दर्ज किए गए।

    पॉलिमर के प्रकार और生态 जोखिम

    इस अध्ययन में दस अलग-अलग प्रकार के पॉलिमर की पहचान की गई, जिसमें पॉलीथीन और पॉलीप्रोपाइलीन की मात्रा लगभग 45% थी। पॉलिमर हजार्ड इंडेक्स (Polymer Hazard Index) ने इस माइक्रोप्लास्टिक मिश्रण को श्रेणी IV (Category IV) में रखा है, जो उच्च पारिस्थितिक खतरे का संकेत देता है। हालांकि इस विशिष्ट अध्ययन पर कोई तत्काल आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन दिल्ली सरकार द्वारा फरवरी 2026 में कराए गए TERI अध्ययन जैसे पिछले investigations में रियल-टाइम प्लास्टिक प्रदूषण निगरानी डैशबोर्ड, मासिक माइक्रोप्लास्टिक परीक्षण और ट्रीटमेंट प्लांट में फिल्ट्रेशन अपग्रेड करने जैसे सुझाव दिए गए थे।

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