अंबेडकर यूनिवर्सिटी दिल्ली में छात्रों का प्रदर्शन सातवें दिन भी जारी, खाने-पानी की सप्लाई रोकने के आरोपों से बढ़ा तनाव

अंबेडकर यूनिवर्सिटी दिल्ली (AUD) के कश्मीरी गेट कैंपस में छात्रों का विरोध प्रदर्शन अब सातवें दिन में प्रवेश कर गया है। कैंपस के अंदर और बाहर चल रहे इस हंगामे ने तब और उग्र रूप ले लिया, जब प्रदर्शनकारी छात्रों ने आरोप लगाया कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कैंपस के गेट बंद कर दिए हैं और उनके लिए आने वाले खाने-पानी की सप्लाई तक रोक दी गई है।
यह पूरा विवाद 31 जुलाई 2026 को प्रशासन द्वारा जारी दो सर्कुलर को लेकर शुरू हुआ था। छात्रों का कहना है कि प्रशासन ने नए नियम लागू किए हैं, जिसके तहत अब किसी भी तरह के जमावड़े के लिए पहले अनुमति लेना अनिवार्य होगा। साथ ही, पीएचडी स्कॉलर्स के लिए उपस्थिति (अटेंडेंस) के कड़े नियम बनाए गए हैं, जिसे छात्र अपनी आजादी पर हमला मान रहे हैं। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और छात्र परिषद के सदस्य इस प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे हैं।
प्रशासन और छात्रों के बीच बढ़ती तकरार
छात्रों की मांग है कि कुलपति (VC) कार्यालय के चारों ओर लगाए गए स्थायी बैरिकेड्स हटाए जाएं और कैंपस के मुख्य गेट को खोला जाए, जो कथित तौर पर एक साल से ज्यादा समय से बंद है। तनाव तब चरम पर पहुंच गया जब शुक्रवार रात सुरक्षाकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों तक भोजन और पानी पहुंचाने वाले समर्थकों को रोकने की कोशिश की। सोशल मीडिया पर इस घटना के कुछ वीडियो भी वायरल हुए हैं, जिनमें गार्ड्स और छात्रों के बीच तीखी बहस देखी जा सकती है। शनिवार तक तीन छात्र कैंपस के अंदर और नौ छात्र गेट के बाहर अपना अनिश्चितकालीन धरणा जारी रखे हुए हैं।
दूसरी ओर, यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इन सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि गेट बंद करने का मकसद छात्रों को रोकना नहीं था, बल्कि लाइब्रेरी, लैब और कुछ ब्लॉक्स में पहले से तय मेंटेनेंस का काम चल रहा था, जिसकी सूचना छात्रों को दी गई थी। यूनिवर्सिटी अधिकारियों ने उल्टा यह आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी छात्रों ने सुरक्षा गार्डों के साथ बदसलूकी की और उनके साथ मारपीट की, जिसकी शिकायत अब दिल्ली पुलिस से की गई है।
प्रशासन ने यह भी साफ किया कि कैंपस में विरोध प्रदर्शन के लिए एक निर्धारित जगह पहले से मौजूद है, लेकिन इन छात्रों ने अनिश्चितकालीन धरने के लिए कोई अनुमति नहीं ली थी। हालांकि, यूनिवर्सिटी का दावा है कि वे छात्र प्रतिनिधियों के साथ बातचीत कर रहे हैं और जो मांगें नियमों के दायरे में आती हैं, उन पर सकारात्मक विचार किया जा रहा है।