दिल्ली के मंदिर में अनोखी परंपरा: शिव लिंग पर चढ़ाए जा रहे हैं गर्म चावल
दिल्ली के एक मंदिर में शिव लिंग पर गर्म चावल चढ़ाने की अनोखी परंपरा 'अन्नभिषेक' निभाई जाती है। जानिए शिव पूजा से जुड़ी अन्य खास बातें।

राजधानी दिल्ली अपनी आधुनिकता के साथ-साथ गहरी आध्यात्मिक परंपराओं के लिए भी जानी जाती है। यहाँ एक ऐसा अनोखा धार्मिक अनुष्ठान देखने को मिलता है जिसे दिल्ली में अन्नभिषेक ritual कहा जाता है। इस विशेष परंपरा के तहत शिव लिंग पर गर्म चावल अर्पित किए जाते हैं, जो भक्तों की अटूट आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है। माना जाता है कि चावलों का यह अर्पण समृद्धि और खुशहाली लाने वाला होता है।
आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिव पूजा में चावलों का विशेष महत्व है। पूज्य शिवकांत जी महाराज के मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति आध्यात्मिक या भौतिक लाभ चाहता है, तो वह शिव लिंग पर 11 अक्षत (बिना टूटे हुए) चावल के दाने अर्पित कर सकता है। इस नियम के अनुसार, महिलाओं को यह प्रक्रिया 21 दिनों तक और पुरुषों को 41 दिनों तक करनी चाहिए।
दिल्ली के प्रमुख शिव मंदिर और उनकी मान्यताएं
दिल्ली में भगवान शिव के कई ऐसे केंद्र हैं जहाँ हज़ारों भक्त अपनी मन्नतें लेकर आते हैं। इनमें कुछ प्रमुख स्थान इस प्रकार हैं:
- मदीपुर मंदिर: पश्चिम दिल्ली के मदीपुर में एक ऐसा मंदिर है जहाँ स्वयं प्रकट (स्वयंभू) शिव लिंग स्थित है। भक्तों का विश्वास है कि यह शिव लिंग करीब 5,000 साल पुराना है।
- 111 नर्मदेश्वर महादेव मंदिर: यहाँ एक साथ 111 नर्मदेश्वर शिव लिंग स्थापित हैं, जहाँ नियमित रूप से रुद्राभिषेक किया जाता है।
- गौरी शंकर मंदिर: चांदनी चौक स्थित यह ऐतिहासिक मंदिर जलाभिषेक के लिए दिल्ली के सबसे प्रमुख स्थलों में से एक है।
- रोहिणी सेक्टर 8: यहाँ 'महादेव की रसोई' संचालित है, जहाँ मुफ्त भोजन के साथ-साथ हर सोमवार को भोलेनाथ का अभिषेक किया जाता है।
- कोंडली: हाल के वर्षों में कोंडली इलाके में सफाई अभियान के दौरान एक प्राचीन शिव लिंग मिलने के बाद यहाँ श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ी है।
इन पवित्र अनुष्ठानों को करते समय कुछ पारंपरिक नियमों का पालन भी किया जाता है। विशेषज्ञों और पुजारियों का सुझाव है कि अभिषेक के दौरान जल अर्पित करने के लिए शंख का उपयोग करने से बचना चाहिए, ताकि परंपरा की शुद्धता बनी रहे।