'दिल्ली में लगा है अघोषित आपातकाल', चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन के बीच राष्ट्रपति से मिलेंगे विपक्षी नेता

देश की राजधानी दिल्ली में इन दिनों सियासी पारा चरम पर है। चुनाव आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में गड़बड़ियों के आरोपों को लेकर विपक्षी दलों का विरोध प्रदर्शन जारी है। इस बीच, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि दिल्ली में एक 'अघोषित आपातकाल' लागू कर दिया गया है। विपक्षी सांसद अब अपनी इन चिंताओं को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करने की तैयारी कर रहे हैं।
संसद पहुंचे केसी वेणुगोपाल ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि सरकार तानाशाही तरीके से काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनों को रोकने के लिए सार्वजनिक परिवहन और आवाजाही पर पाबंदियां लगा दी गई हैं। वेणुगोपाल ने कहा, "मेट्रो स्टेशनों और ट्रेनों को रोका गया है, जिससे यह साफ है कि सरकार पूरी तरह डरी हुई है। एक लोकतांत्रिक देश में विरोध प्रदर्शन और जुलूस निकलते हैं, लेकिन यह सरकार उन्हें दबाने की कोशिश कर रही है।"
ट्रेनों की कैंसिलेशन और आम जनता की परेशानी
इस पूरे घटनाक्रम पर पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि ट्रेनों के कैंसिलेशन की वजह से छात्रों और युवाओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बनर्जी ने विशेष रूप से कोलकाता से चलने वाली राजधानी एक्सप्रेस जैसी महत्वपूर्ण ट्रेनों के रद्द होने पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी विपक्षी नेता आपस में चर्चा करेंगे और उसके बाद ही आगे की रणनीति तय की जाएगी।
वहीं, कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने सरकार के रवैये पर तीखा हमला करते हुए कहा कि सरकार अन्य राज्यों से पुलिस बल बुलाकर और भारी खर्च करके जनता को परेशान कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जो सरकार आतंकवादियों से बात कर सकती है, वह अपने ही देशवासियों से संवाद करने में क्यों कतरा रही है? उन्होंने उम्मीद जताई कि राष्ट्रपति मुर्मू उनकी शिकायतों को सुनेंगी और नागरिकों को इन 'अतिशयोक्तियों' से बचाएंगी।
गौरतलब है कि इंडिया गठबंधन के सदस्य पिछले तीन दिनों से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि चुनावी सूचियों के पुनरीक्षण में अनियमितताएं बरती गई हैं, हालांकि चुनाव आयोग और भाजपा ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। इस बैठक में कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार समेत कई दिग्गज नेता शामिल हो रहे हैं।