AI समिट प्रोटेस्ट केस: IYC अध्यक्ष उदय भानु चिब को पासपोर्ट देने से कोर्ट का इनकार
पटियाला हाउस कोर्ट ने IYC अध्यक्ष उदय भानु चिब की पासपोर्ट वापस लेने की याचिका खारिज की। कोर्ट ने कहा कि जमानत की शर्तें नहीं हटाई जा सकतीं।

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) के अध्यक्ष उदय भानु चिब को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने उनकी वह याचिका खारिज कर दी है, जिसमें उन्होंने जमानत की शर्तों में बदलाव कर अपना पासपोर्ट वापस मांगा था। उदय भानु चिब AI समिट विरोध प्रदर्शन मामले में नियमित जमानत पर हैं, लेकिन उनकी जमानत की एक शर्त यह थी कि उन्हें अपना पासपोर्ट अदालत में जमा करना होगा।
मामले की सुनवाई के दौरान एडिशनल सेशन जज धीरेंद्र राणा ने दिल्ली पुलिस की दलीलों को सही मानते हुए कहा कि सिर्फ इसलिए कि पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी है, जमानत की शर्तों को हटाया नहीं जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपी यह बताने में विफल रहे कि पासपोर्ट जमा होने की वजह से उन्हें किस तरह की गंभीर कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
कोर्ट में क्या दलीलें दी गईं?
उदय भानु चिब के वरिष्ठ वकील ने दलील दी कि उनके मुवक्किल ने कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए पासपोर्ट जमा किया था। उन्होंने तर्क दिया कि चिब के फरार होने की कोई संभावना नहीं है और खुद ट्रायल कोर्ट ने जमानत देते समय उन्हें 'फ्लाइट रिस्क' नहीं माना था। वकील का कहना था कि जांच में पूरा सहयोग करने और चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब पासपोर्ट रखने का कोई औचित्य नहीं रह गया है।
दूसरी तरफ, दिल्ली पुलिस की ओर से स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर (SPP) प्रशांत प्रकाश ने कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि जमानत की शर्तें आरोपी की उपस्थिति सुनिश्चित करने और निष्पक्ष जांच के लिए लगाई गई थीं। SPP ने कोर्ट में तर्क दिया कि आवेदन में किसी भी ऐसी आपात स्थिति का जिक्र नहीं है जिसके आधार पर शर्तों को बदला जाए, और यह आवेदन अदालत के समय की बर्बादी है।
जज राणा ने अपने आदेश में कहा कि यदि आरोपी विदेश यात्रा करना चाहते हैं, तो उन्हें पहले ट्रायल कोर्ट से अनुमति लेनी होगी। अगर कोर्ट अनुमति देता है, तो एक निश्चित समय के लिए पासपोर्ट जारी किया जा सकता है, बशर्ते वह उसे वापस जमा करने का वचन दें। इसी आधार पर कोर्ट ने उनकी याचिका को मेरिटहीन मानकर खारिज कर दिया।