त्रिलोकपुरी में वोटर लिस्ट विवाद: 'वोट चोरी' के आरोपों के बीच जन सुनवाई में जुटे लोग
दिल्ली के त्रिलोकपुरी में वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने पर भारी विरोध। राहुल गांधी ने लगाया 'वोट चोरी' का आरोप।

दिल्ली के त्रिलोकपुरी इलाके में मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को एक बड़ी 'जन सुनवाई' का आयोजन किया गया। यह पूरा मामला वोटर लिस्ट से बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम गायब होने से जुड़ा है। स्थानीय निवासी इस बात से बेहद नाराज हैं कि उनके नाम बिना किसी ठोस आधार के चुनावी सूचियों से हटा दिए गए हैं। हैरानी की बात तो यह है कि कुछ लोग खुद वहां मौजूद थे, जबकि रिकॉर्ड में उन्हें 'मृत' घोषित कर दिया गया था।
इस विवाद की गहराई तब सामने आई जब 23 से 26 अक्टूबर के बीच एक चार दिवसीय डोर-टू-डोर सर्वे किया गया। इस सर्वे में चार पोलिंग बूथों (42, 43, 79 और 80) के 1,236 हटाए गए मतदाताओं की जांच की गई, जिनमें से 416 मामलों में नाम गलत तरीके से हटाए जाने की बात सामने आई। लोगों का आरोप है कि उन्होंने जरूरी फॉर्म जमा किए थे, फिर भी उनके नाम काट दिए गए।
राहुल गांधी ने लगाया 'वोट चोरी' का आरोप
इस जन सुनवाई में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शिरकत की और चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर 'वोट चोरी' की निगरानी करने का आरोप लगाया और उनके इस्तीफे की मांग की। उनके साथ ही सीपीआई(एमएल) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, योगेंद्र यादव, वकील प्रशांत भूषण, आरजेडी सांसद संजय यादव और अन्य प्रमुख नेता भी मौजूद रहे। दीपांकर भट्टाचार्य ने चुनाव आयोग के दावों को चुनौती देते हुए 1 नवंबर को एक रैली निकालने का ऐलान किया।
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) प्रक्रिया को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) ने बिना किसी सूचना या संपर्क के लोगों को 'अनुपस्थित', 'स्थायी रूप से स्थानांतरित' या 'मृत' (ASDD) के रूप में चिह्नित कर दिया।
दिल्ली मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के आंकड़ों ने भी इस विवाद को हवा दी है। 27 अक्टूबर को जारी आंकड़ों के मुताबिक, ड्राफ्ट रोल से करीब 47.57 लाख नाम हटाए गए, लेकिन एक लाख से अधिक विशेष शिविरों के बावजूद केवल 27,510 फॉर्म 6 आवेदन ही प्राप्त हुए।
बढ़ते विवाद को देखते हुए दिल्ली CEO कार्यालय ने अब हटाए गए पात्र मतदाताओं के पुन: सत्यापन और नामांकन के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया है। हालांकि, मजदूर किसान शक्ति संगठन (MKSS) और वोटर अधिकार मंच जैसे आयोजकों ने वर्तमान SIR प्रक्रिया को पूरी तरह रद्द करने और चुनाव आयोग के पुनर्गठन की मांग की है।