गुरुग्राम में खुली 'Treasure of India' आर्ट गैलरी, दिग्गज स्वदेशी कलाकारों की कृतियां होंगी प्रदर्शित

गुरुग्राम के पालम विहार में Treasure of India गैलरी खुली है, जहाँ 'नवरत्न' प्रदर्शनी के जरिए भारत के दिग्गज स्वदेशी कलाकारों की कृतियाँ दिखेंगी।

Kittu Kumari29 October 20262 min read0 viewsNCR
गुरुग्राम में खुली 'Treasure of India' आर्ट गैलरी, दिग्गज स्वदेशी कलाकारों की कृतियां होंगी प्रदर्शित

कला प्रेमियों के लिए गुरुग्राम में एक नई सौगात आई है। शहर के पालम विहार (सेक्टर 2, पालम विहार रोड) में Treasure of India art gallery की शुरुआत हो चुकी है। यह गैलरी केवल एक प्रदर्शनी केंद्र नहीं है, बल्कि यह कलाकार अशोक सम्राट बख्शी की 45 साल की कला संग्रह की विरासत को आगे बढ़ाने की एक कोशिश है, जिसे उनकी बेटी तनिषा बख्शी ने साकार किया है।

गैलरी की शुरुआत एक शानदार प्रदर्शनी 'नवरत्न: इंडीजीनस मास्टर्स' के साथ हुई है। 17 अक्टूबर को वीआईपी प्रिव्यू के बाद 18 अक्टूबर से इसे आम जनता के लिए खोल दिया गया। यह प्रदर्शनी 27 दिसंबर 2026 तक चलेगी, जहां लोग हर दिन सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक कलाकृतियों का आनंद ले सकते हैं।

इन दिग्गज कलाकारों की कला का दिखेगा जादू

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इस प्रदर्शनी की सबसे खास बात यह है कि इसमें देश के नौ मान्यता प्राप्त दिग्गज कलाकारों की मास्टरपीस शामिल हैं, जो भारत की विविध स्वदेशी परंपराओं को दर्शाते हैं। इनमें शामिल हैं:

  • डोकरा आर्ट: नेशनल अवार्ड विजेता बलदेव वाघमारे और हीराबाई झारेका बघेल।
  • गोंड आर्ट: मास्टर आर्टिसन ननकुसिया श्याम।
  • सोहराई आर्ट: लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड विजेता पुतली गंजू।
  • पट्टचित्र आर्ट: नेशनल अवार्ड विजेता निरंजन महाराणा और अक्षय कुमार बारिकी।
  • कालीघाट पेंटिंग: स्टेट अवार्ड विजेता पुतुल चित्रकार।
  • पिछवाई और मिनिएचर पेंटिंग: मास्टर आर्टिसन लीलकमत पारीक और सुदर्शन पारीक।

गैलरी की संस्थापक तनिषा बख्शी का कहना है कि उनका मकसद इन महान रचनाकारों को वह सम्मान, गरिमा और आर्थिक मूल्य दिलाना है, जिसके वे हकदार हैं। वह चाहती हैं कि इन कलाकारों की पीढ़ियों पुरानी विरासत दुनिया के सामने आए।

इस पहल को और मजबूती देने के लिए 'ट्रेजर ऑफ इंडिया आर्ट फाउंडेशन' भी काम कर रहा है, जो कलाकारों के लिए रेजिडेंसी, स्किल वर्कशॉप और स्वदेशी समुदायों को सीधा समर्थन प्रदान करता है। प्रसिद्ध कला इतिहासकार और क्यूरेटर उमा नायर ने इस संग्रह की सराहना करते हुए कहा कि ये कृतियाँ अपनी सादगी के जरिए भारतीय विरासत की गहराई और सुंदरता को बखूबी बयां करती हैं।

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