चुनावी प्रदर्शनों से व्यापार ठप, ट्रेड बॉडीज ने पीएम मोदी और राहुल गांधी से लगाई गुहार

देशभर के व्यापारिक और औद्योगिक संगठनों ने राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों के कारण हो रहे भारी आर्थिक नुकसान पर गहरी चिंता जताई है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक और केरल के व्यापार संघों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। व्यापारियों का कहना है कि चुनावी मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) को लेकर चल रहे प्रदर्शनों की वजह से बाजारों में सन्नाटा पसरा है और व्यापार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
यह मामला तब गंभीर हो गया जब नवरात्रि, दशहरा, दिवाली और छठ पूजा जैसे बड़े त्योहारों के सीजन में सड़कों पर जाम और बाजारों तक पहुंच बाधित होने लगी। व्यापारियों का तर्क है कि राजनीतिक लड़ाई में आम कारोबारियों को 'कोलैटरल डैमेज' यानी अनचाहा शिकार नहीं बनाया जाना चाहिए। भारतीय उद्योग व्यापार मंडल की दिल्ली इकाई ने विशेष रूप से राहुल गांधी से अपील की है कि वे इन प्रदर्शनों को समाप्त करें ताकि बाजारों में सामान्य स्थिति लौट सके।
तीन दिनों में 2000 करोड़ का नुकसान
प्रदर्शनों के असर का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के अनुसार, दिल्ली के दुकानदारों और सेवा क्षेत्र के व्यवसायों को महज तीन दिनों में लगभग 2,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। बुनियादी ढांचे की बंदी और अनिश्चितता के माहौल ने ग्राहकों को बाजारों से दूर कर दिया है।
इस पूरे विवाद की जड़ चुनाव आयोग द्वारा 27 अक्टूबर 2025 को शुरू की गई मतदाता सूची की विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया है। राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाने और अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मई 2026 में इस प्रक्रिया को वैध ठहराया था, लेकिन विपक्ष अब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग कर रहा है।
वहीं, दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं, जिसमें जंतर मंतर को विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में डी-नोटिफाई करना और कुछ मेट्रो स्टेशनों को बंद करना शामिल है। इन कदमों ने व्यापारियों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। अब सभी की नजरें 15 अक्टूबर 2026 को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं, जबकि व्यापारी उम्मीद कर रहे हैं कि राजनीतिक नेतृत्व जल्द ही कोई बीच का रास्ता निकालेगा।