भारत का बदलता रियल एस्टेट बाजार: टीयर-2 शहरों में तेजी से बढ़ रही है आवास की मांग

दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों तक सीमित रहने वाला भारत का रियल एस्टेट बाजार अब बदल रहा है। सीआईआई-नाइट फ्रैंक (CII-Knight Frank) के एक अध्ययन के अनुसार, 2021 से 2026 के बीच 11 उभरते बाजारों में आवासीय कीमतों में 63 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि भारत के आठ सबसे बड़े शहरों में यह वृद्धि 42 प्रतिशत रही है। इस सूची में चंडीगढ़ ट्राइसिटी और लखनऊ जैसे प्रमुख बाजार शामिल हैं। यह बदलाव इस बात का प्रमाण है कि ये शहर अब केवल बड़े महानगरों के विस्तार का इंतजार नहीं कर रहे हैं, बल्कि इनकी अपनी मजबूत आर्थिक स्थिति बन चुकी है।
चंडीगढ़ ट्राइसिटी इसका एक स्पष्ट उदाहरण है, जहां मोहाली और न्यू चंडीगढ़ क्षेत्रीय शहरी अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा बन चुके हैं। होमलैंड ग्रुप के सीईओ उमंग जिंदल के अनुसार, ट्राइसिटी को अब तीन अलग-अलग स्थानों के बजाय एक जुड़े हुए बाजार के रूप में देखा जा रहा है।मोहाली और हवाई अड्डा गलियारे के विकास ने इस क्षेत्र की पूरी तस्वीर बदल दी है।जीबी रियल्टी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक गुरिंदर भट्टी का कहना है कि बुनियादी ढांचे और नए आवासीय क्षेत्रों के तालमेल से यह क्षेत्र आत्मनिर्भर शहरी गंतव्य के रूप में उभर रहा है। गिलको ग्रुप के प्रबंध निदेशक तेजप्रीत सिंह गिल के अनुसार, बेहतर होती कनेक्टिविटी और सुनियोजित परियोजनाओं के कारण खरीदार इस क्षेत्र में गहरी रुचि दिखा रहे हैं।
चंडीगढ़ के अलावा देश के अन्य उभरते शहरी बाजारों में भी ऐसा ही रुख देखने को मिल रहा है। असोटेक रियल्टी के प्रबंध निदेशक नीरज गुलाटी का कहना है कि उभरते शहरों का मूल्यांकन अब नए पैमानों पर किया जा रहा है। उदाहरण के लिए, शिर्डी जैसे धार्मिक स्थल पर तीर्थयात्रियों की संख्या के साथ-साथ लोगों की आधुनिक सुविधाओं और आतिथ्य सत्कार की उम्मीदें भी बढ़ रही हैं। अंशुल हाउसिंग के निदेशक कुशाग्र बंसल का कहना है कि बेहतर सड़क नेटवर्क और विस्तार लेते शहरी केंद्रों के कारण हरियाणा और पंजाब के छोटे शहरों और क्षेत्रीय बाजारों को देखने का नजरिया बदला है। सिक्का ग्रुप के चेयरमैन हरविंदर सिंह सिक्का के अनुसार, लखनऊ में भी मांग शहर के स्थापित और नए दोनों हिस्सों में तेजी से फैल रही है, जहां जागरूक खरीदार बेहतर बुनियादी ढांचे और सुविधाओं की उम्मीद कर रहे हैं।
रियल एस्टेट डेवलपर्स के लिए यह नया नक्शा केवल छोटे शहरों में बढ़ती कीमतों का सूचक नहीं है, बल्कि यह वह क्षेत्र है जहां बुनियादी ढांचा, रोजगार, शहरीकरण और खरीदार की उम्मीदें आपस में मिल रही हैं। आगामी रियल एस्टेट बाजार वे शहर होंगे जो दिल्ली या मुंबई बनने का इंतजार नहीं कर रहे, बल्कि अपने दम पर एक मजबूत आर्थिक और शहरी पहचान बना रहे हैं। मूल जानकारी के लिए NewsVoir की रिपोर्ट यहाँ देखी जा सकती है।