मुंबई: वोटर लिस्ट में गड़बड़ी पर साथ आए राज और उद्धव ठाकरे, CEC के खिलाफ निकाला 'विराट गर्जना मोर्चा'

Kittu Kumari4 October 20262 min read0 viewsNational
मुंबई: वोटर लिस्ट में गड़बड़ी पर साथ आए राज और उद्धव ठाकरे, CEC के खिलाफ निकाला 'विराट गर्जना मोर्चा'

मुंबई की सड़कों पर एक ऐसा नजारा देखने को मिला जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। मतदाता सूची के 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) में धांधली और 'वोट चोरी' के गंभीर आरोपों को लेकर महाराष्ट्र नव निर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे और शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे एक साथ नजर आए। दोनों नेताओं ने मिलकर 'विराट गर्जना मोर्चा' का नेतृत्व किया, जिसका मुख्य निशाना मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार हैं।

प्रदर्शन के दौरान उद्धव ठाकरे ने तीखे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए CEC ज्ञानेश कुमार को भाजपा का 'हथियार' बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा नहीं देते और कानूनी कार्रवाई का सामना नहीं करते, तब तक विपक्ष शांत नहीं बैठेगा। ठाकरे ने मौजूदा सरकार की तुलना हिटलर के तानाशाही शासन से करते हुए लोकतंत्र की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की।

लोकतंत्र बचाने की जंग और बढ़ता विरोध

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यह विरोध प्रदर्शन केवल ठाकरे भाइयों तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें कांग्रेस और शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) ने भी अपना समर्थन दिया। यह पूरा घटनाक्रम 'INDIA' गठबंधन द्वारा घोषित 'सेव डेमोक्रेसी मार्च' (2 से 8 अक्टूबर) का हिस्सा है, जिसके तहत देशभर में प्रदर्शन किए जा रहे हैं।

मुंबई में तनाव का माहौल तब और बढ़ गया जब 3 अक्टूबर को अभिजीत दिपके की कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने शिवाजी पार्क में प्रदर्शन किया। इस दौरान 75 वर्षीय प्रदर्शनकारी गोपाल कृष्ण सुमाया पिल्लई को दिल का दौरा पड़ा, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। CJP ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे 'जेल भरो आंदोलन' करेंगे और दिल्ली के जंतर मंतर की ओर कूच करेंगे।

विरोध की यह लहर दिल्ली तक भी पहुंची है, जहां आम आदमी पार्टी (AAP) और लेफ्ट पार्टी के नेताओं को जंतर मंतर की ओर मार्च करते समय हिरासत में लिया गया। हालांकि, चुनाव आयोग ने 20 राज्यों में लापता और नए मतदाताओं के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया है, लेकिन विपक्ष के आरोपों पर भाजपा ने कड़ा रुख अपनाया है। भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने इन सभी आरोपों को मनगढ़ंत बताते हुए विपक्ष की मंशा पर सवाल उठाए हैं। फिलहाल, चुनावी प्रक्रिया की ईमानदारी को लेकर छिड़ी यह जंग और तेज होती दिख रही है।

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