रेडियल रोड-II टेंडर विवाद: तेलंगाना हाई कोर्ट ने सफल बिडर्स को केस में शामिल करने का दिया आदेश

Kittu Kumari12 October 20262 min read0 viewsNational
रेडियल रोड-II टेंडर विवाद: तेलंगाना हाई कोर्ट ने सफल बिडर्स को केस में शामिल करने का दिया आदेश

तेलंगाना हाई कोर्ट ने रेडियल रोड-II प्रोजेक्ट के टेंडर से जुड़े कानूनी विवाद में एक महत्वपूर्ण मोड़ लाते हुए अदालत ने याचिकाकर्ता कंपनी M/s सुशी इंफ्रा एंड माइनिंग लिमिटेड को निर्देश दिया है कि वह इस मामले में सफल बिडर्स (Successful Bidders) को भी पक्षकार बनाए। जस्टिस बी. विजयसेन रेड्डी ने सोमवार को सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि चूंकि तकनीकी और वित्तीय बोलियां पहले ही फाइनल की जा चुकी हैं, इसलिए सफल पार्टियों की मौजूदगी के बिना इस विवाद का प्रभावी समाधान संभव नहीं है।

पूरा मामला रेडियल रोड-II प्रोजेक्ट से जुड़ा है, जो 81.15 किलोमीटर लंबा एक ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे है। यह सड़क कोथवलगुडा में आउटर रिंग रोड को NH-167N से जोड़ेगी। इस प्रोजेक्ट को तीन पैकेज में बांटा गया था। इनमें से पैकेज-I का ठेका NCC लिमिटेड को 1,286.03 करोड़ रुपये में दिया गया, जबकि पैकेज II और III के लिए क्रमशः BVSR और GKC को सफल बिडर चुना गया।

अनुभव प्रमाण पत्र और 600 करोड़ के नुकसान का दावा

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इस विवाद की जड़ में कांग्रेस विधायक राजगोपाल रेड्डी की कंपनी M/s सुशी इंफ्रा एंड माइनिंग लिमिटेड की अयोग्यता है। कंपनी को इस आधार पर बाहर कर दिया गया कि उनके अनुभव प्रमाण पत्र पर सुपरइंटेंडिंग इंजीनियर के काउंटर हस्ताक्षर नहीं थे। कंपनी का तर्क है कि उनका प्रमाण पत्र पूरी तरह वैध था। याचिकाकर्ता का दावा है कि सबसे कम बोली लगाने के बावजूद उन्हें बाहर किया गया, जिससे राज्य सरकार को लगभग 600 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान हो सकता है।

कंपनी ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों ने टेंडर की क्लॉज 3(iii) और 22 का पालन नहीं किया, जिसके तहत बोलियों में किसी भी विसंगति होने पर स्पष्टीकरण मांगना जरूरी होता है।

इस बीच, इस प्रोजेक्ट ने राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है। भारत राष्ट्र समिति (BRS) के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामा राव ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी को एक खुला पत्र लिखकर 3,296 करोड़ रुपये के इस टेंडर में अनियमितताओं का आरोप लगाया है। उन्होंने सवाल उठाया कि कैसे केवल पांच कार्य दिवसों में 13 बोलियों का मूल्यांकन कर लिया गया। उन्होंने तकनीकी मूल्यांकन में विसंगतियों का जिक्र करते हुए वर्तमान टेंडरों को रद्द करने और पूरी जांच की मांग की है।

अदालत ने अब इस मामले की अगली सुनवाई दशहरा की छुट्टियों के बाद तय की है। तब तक हैदराबाद ग्रोथ कॉरिडोर लिमिटेड (HGCL) और हैदराबाद मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (HMDA) द्वारा टेंडर प्रक्रिया को अंतिम रूप देने का कोई भी निर्णय न्यायिक समीक्षा के अधीन रहेगा।

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