टाटा कम्युनिकेशंस का बड़ा दांव: भारत में बनेगा 'AI सुपर हाईवे', 4350 करोड़ रुपये का निवेश
टाटा कम्युनिकेशंस भारत में AI सुपर हाईवे बनाने के लिए 4,350 करोड़ रुपये निवेश करेगा, जिससे डेटा सेंटर्स को मिलेगी हाई-स्पीड कनेक्टिविटी।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में भारत को तकनीकी रूप से और मजबूत बनाने के लिए टाटा कम्युनिकेशंस ने एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी देश भर में एक 'AI सुपर हाईवे' विकसित करने जा रही है, जिसके लिए लगभग 450 मिलियन डॉलर यानी करीब 4,350 करोड़ रुपये का रणनीतिक निवेश किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य देश के महत्वपूर्ण AI डेटा-सेंटर कॉरिडोर को एक हाई-स्पीड और लो-लेटेंसी नेटवर्क से जोड़ना है, ताकि डेटा का आदान-प्रदान बिजली की रफ्तार से हो सके।
इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत कंपनी लगभग 10,000 किलोमीटर लंबी नई लॉन्ग-हॉल फाइबर बिछाएगी। यह बुनियादी ढांचा देश के सबसे बड़े AI-रेडी कनेक्टिविटी नेटवर्क में से एक होगा। इसे कंपनी के ग्लोबल नेटवर्क बैकबोन के साथ इंटीग्रेट किया जाएगा, जिससे अगली पीढ़ी के AI वर्कलोड की परफॉर्मेंस, लचीलापन और स्केल की जरूरतों को पूरा किया जा सके। टाटा कम्युनिकेशंस के एमडी और सीईओ गणेश लक्ष्मीनारायण के मुताबिक, भारत के डेटा सेंटर-टू-डेटा सेंटर कनेक्टिविटी मार्केट में बिजनेस के बड़े अवसर हैं, जिसकी वैल्यू आने वाले समय में 1 बिलियन डॉलर से अधिक हो सकती है।
तीन चरणों में पूरा होगा प्रोजेक्ट, इन शहरों को मिलेगा फायदा
इस पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर रोलआउट को तीन चरणों में बांटा गया है, जिसे पूरा होने में तीन से पांच साल का समय लगेगा। इसकी शुरुआत और विस्तार कुछ इस तरह होगा:
- पहला चरण: सबसे पहले मुंबई-पुणे-हैदराबाद-चेन्नई कॉरिडोर पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
- अगले चरण: इसके बाद विशाखापत्तनम, भुवनेश्वर, जामनगर और गिफ्ट सिटी (GIFT City) जैसे उभरते इकोसिस्टम को इस नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।
कंपनी के चीफ प्रोडक्ट और टेक्नोलॉजी ऑफिसर रूपेश चोक्षी ने बताया कि AI इकोनॉमी को चलाने के लिए एक ऐसे विशेष नेटवर्क की जरूरत है जो रफ्तार और स्केल के मामले में बेजोड़ हो, ताकि ग्लोबल कस्टमर्स पूरे भरोसे के साथ AI तैनात कर सकें। यह प्रोजेक्ट कंपनी के ऑपरेटिंग कैश फ्लो के जरिए फंड किया जाएगा। लक्ष्य यह है कि वित्त वर्ष 2030 और 2036 के बीच नेटवर्क क्षमता में लगभग 6 पेटाबिट्स प्रति सेकंड (Pbps) की बढ़ोतरी की जाए।
यह कमर्शियल-ग्रेड नेटवर्क हाइपरस्केलर्स, AI प्लेटफॉर्म्स, नियो-क्लाउड प्रोवाइडर्स और बड़े उद्यमों के लिए मददगार साबित होगा। इसके जरिए घरेलू डेटा क्लस्टर्स को अंतरराष्ट्रीय केबल लैंडिंग स्टेशनों से जोड़ा जाएगा, जिससे भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिलेगी।