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सरकारी स्कूलों में अब बच्चों को मिलेगी चिकन बिरयानी, मिड-डे मील में बड़े बदलाव की तैयारी

Kittu Kumari30 July 20262 min read27 views
सरकारी स्कूलों में अब बच्चों को मिलेगी चिकन बिरयानी, मिड-डे मील में बड़े बदलाव की तैयारी

तमिलनाडु सरकार अपने सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील (Mid-day Meal) योजना को और बेहतर बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य सरकार अब छात्रों को हफ्ते में एक दिन चिकन बिरयानी देने पर विचार कर रही है। इस प्रस्ताव को लेकर शिक्षा मंत्री ए. राजमोहन ने पुष्टि की है कि इसे मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के पास समीक्षा के लिए भेज दिया गया है।

  • सरकारी स्कूलों में हफ्ते में एक दिन चिकन बिरयानी देने का प्रस्ताव।
  • 80 से 100 शिक्षक संघों की मांग पर सरकार ने शुरू की समीक्षा।
  • मिड-डे मील और ब्रेकफास्ट स्कीम का विस्तार 11वीं-12वीं तक करने की योजना।
  • चावल की क्वालिटी सुधारने और नाश्ते के मेन्यू में बदलाव पर भी विचार।

शिक्षक संघों की मांग पर सरकार का बड़ा फैसला

यह पहल 28 जुलाई 2026 को शिक्षक संघों के साथ हुई एक बैठक के बाद सामने आई है, जिसमें 80 से 100 से अधिक संगठनों ने खाने की गुणवत्ता सुधारने की मांग की थी। सरकार का मुख्य उद्देश्य छात्रों को प्रोटीन से भरपूर भोजन उपलब्ध कराना है ताकि उनकी सेहत में सुधार हो सके और स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति बढ़े। शिक्षा मंत्री ने कहा है कि इस पर अंतिम निर्णय सोशल वेलफेयर और महिला सशक्तिकरण विभाग के साथ चर्चा के बाद लिया जाएगा।

खाने की क्वालिटी और मेन्यू में होगा बड़ा बदलाव

सिर्फ बिरयानी ही नहीं, बल्कि सरकार स्कूलों में मिलने वाले चावल की ग्रेडिंग और क्वालिटी को भी बेहतर करना चाहती है। इसके अलावा, नाश्ते के मेन्यू में भी बदलाव की तैयारी है, जिसमें गेहूं और रवा उपमा जैसे पुराने विकल्पों की जगह अब ज्यादा पौष्टिक और स्वादिष्ट भोजन शामिल किया जाएगा। इन बदलावों का लक्ष्य छात्रों को स्कूल आने के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें बेहतर पोषण देना है।

11वीं और 12वीं के छात्रों को भी मिलेगा मिड-डे मील

सरकार अब मिड-डे मील और 'मुख्यमंत्री ब्रेकफास्ट स्कीम' का विस्तार उच्च माध्यमिक कक्षाओं (11वीं और 12वीं) तक करने की योजना बना रही है। वर्तमान में, कक्षा 1 से 10 तक के लगभग 40 लाख छात्र मिड-डे मील का लाभ ले रहे हैं। इस विस्तार से राज्य के करीब 8 लाख अतिरिक्त छात्रों को सीधा फायदा होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूली उम्र के बच्चों के लिए पौष्टिक भोजन न केवल ड्रॉपआउट रेट कम करेगा, बल्कि उनकी पढ़ाई में एकाग्रता भी बढ़ाएगा।

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