NGMA में 'तक्षणम' प्रदर्शनी का आगाज, 150 कलाकारों की 250 से ज्यादा मूर्तियां देख सकेंगे दर्शक

नई दिल्ली की नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट (NGMA) में कला प्रेमियों के लिए एक खास मौका आया है। केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने 'तक्षणम' (TAKSHANAM) नामक एक भव्य प्रदर्शनी का उद्घाटन किया है। इस प्रदर्शनी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें देश के अलग-अलग पीढ़ियों और बैकग्राउंड से ताल्लुक रखने वाले 150 कलाकारों ने हिस्सा लिया है, जिन्होंने अपनी रचनात्मकता से 250 से अधिक शानदार मूर्तियां तैयार की हैं।
इस मौके पर संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल भी मौजूद रहे। यह प्रदर्शनी भारतीय मूर्तिकला के बदलते स्वरूप, उसकी परंपराओं और भविष्य की संभावनाओं को एक मंच पर लाने की कोशिश है। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि कला भारत की सांस्कृतिक पहचान और रचनात्मक भावना की अभिव्यक्ति है। 'तक्षणम' जैसे प्रयास कलाकारों और आम जनता के बीच की दूरी को कम करते हैं और हमारी कलात्मक परंपराओं के प्रति सम्मान बढ़ाते हैं।
परंपरा और आधुनिकता का संगम
प्रदर्शनी के बारे में जानकारी देते हुए NGMA के महानिदेशक डॉ. संजीव किशोर गौतम ने बताया कि भारत की मूर्तिकला का इतिहास सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर अजंता, एलोरा और खजुराहो के मंदिरों तक बहुत समृद्ध रहा है। 'तक्षणम' शब्द संस्कृत के 'तक्ष्' मूल से आया है, जिसका अर्थ है तराशना या आकार देना। यह प्रदर्शनी इसी विचार को आगे बढ़ाती है कि कैसे विचार, अनुभव और सामग्री मिलकर एक कलाकृति का रूप लेते हैं।
इस प्रदर्शनी को दो मुख्य हिस्सों में बांटा गया है। पहला हिस्सा 'प्रतिष्ठित कलाकार' (Eminent Artists) के लिए है, जहाँ अनुभवी कलाकारों की कृतियाँ प्रदर्शित हैं। वहीं दूसरा हिस्सा 'ओपन कॉल कलाकारों' (Open Call Artists) के लिए है, जिसमें ज्यूरी द्वारा चुने गए करीब 80-90 नए और उभरते कलाकारों के काम को जगह मिली है। इसके अलावा, NGMA के अपने कलेक्शन से भी कुछ कलाकृतियां यहाँ रखी गई हैं, ताकि पुराने और नए दौर की कला के बीच एक संवाद स्थापित हो सके।
एक और खास बात यह है कि NGMA में पहली बार कलाकृतियों की बिक्री की पहल की गई है। संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल ने बताया कि इस कदम का मकसद कलाकारों को कलेक्टरों और कला प्रेमियों से जोड़ना है। मूर्तिकला में सामग्री और समय का काफी खर्च होता है, ऐसे में यह पहल कलाकारों को आर्थिक सहयोग दिलाने और उनकी कला को टिकाऊ बनाने में मदद करेगी।