2020 दिल्ली दंगे: पूर्व AAP पार्षद ताहिर हुसैन दंगे उकसाने के मामले में दोषी करार

साल 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़की हिंसा के मामले में एक बड़ी कानूनी कार्रवाई हुई है। दिल्ली की एक अदालत ने शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को दंगे उकसाने (Abetment of rioting) का दोषी ठहराया है। यह फैसला उस समय आया जब अदालत ने मामले के विभिन्न पहलुओं और गवाहों के बयानों पर गौर किया।
अदालत ने ताहिर हुसैन को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147 (दंगे की सजा) और धारा 109 (उकसाने की सजा) के तहत दोषी पाया है। हालांकि, इस मामले में लगाए गए अन्य सभी आरोपों से उसे बरी कर दिया गया है। वहीं, इस केस में नामजद सात अन्य सह-आरोपियों—मोहम्मद शादाब, शाह आलम, रियासत अली, गुलफाम, मोहम्मद रिहान, अरशद कय्यूम और इरशाद अहमद को सभी आरोपों से पूरी तरह बरी कर दिया गया है।
दुकान लूटी और आग लगाई, गवाहों ने दी गवाही
यह पूरा मामला दयालपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज एक एफआईआर से शुरू हुआ था। शिकायतकर्ता इरशाद अली, जो एक दुकानदार हैं, ने आरोप लगाया था कि दंगाइयों ने उनकी दुकान को लूटा और उसमें आग लगा दी। इस घटना में करीब 17-18 लाख रुपये के सामान की चोरी और 10 लाख रुपये की संपत्ति का नुकसान होने की बात कही गई थी।
अदालती कार्यवाही के दौरान एक गवाह मोहम्मद जाहिद ने यह अहम बात कही कि हिंसा के दौरान दंगाई ताहिर हुसैन के समर्थन में नारे लगा रहे थे। इसी गवाही और सबूतों के आधार पर अदालत ने हुसैन को दंगे के लिए उकसाने का जिम्मेदार माना।
यह पहली बार नहीं है जब ताहिर हुसैन को दंगों के मामले में सजा मिली हो। इससे पहले जुलाई 2026 में इंटेलिजेंस ब्यूरो के कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में उसे दोषी ठहराया गया था, जिसमें उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। ताहिर हुसैन को 21 अप्रैल 2020 को गिरफ्तार किया गया था और दंगों में नाम आने के बाद आम आदमी पार्टी ने उन्हें निलंबित कर दिया था।
अब अदालत इस नई सजा की अवधि (Quantum of sentence) पर सुनवाई करेगी, जिसके लिए 16 नवंबर की तारीख तय की गई है।