2020 दंगे: पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन दोषी, कोर्ट ने 12 अन्य आरोपियों को किया बरी

साल 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दयालपुर इलाके में भड़की हिंसा के मामले में पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को दिल्ली की एक अदालत ने दोषी ठहराया है। शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को कड़कडूमा कोर्ट के एडिशनल सेशन जज प्रवीण सिंह ने यह फैसला सुनाया। अदालत ने माना कि ताहिर हुसैन ने दंगाइयों को उकसाया और उन्हें अपने घर की छत का इस्तेमाल करने दिया, ताकि वहां से राहगीरों और आसपास की संपत्तियों पर पत्थर फेंके जा सकें।
यह पूरा मामला 24 फरवरी 2020 का है, जब मुख्य करावल नगर रोड पर भारी हिंसा हुई थी। इस मामले की शुरुआत इरशाद अली नाम के व्यक्ति की शिकायत से हुई थी, जिन्होंने आरोप लगाया था कि उस दिन उनकी दुकान में लूटपाट की गई और उसे आग के हवाले कर दिया गया, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ।
इन धाराओं में हुई सजा, अन्य आरोपों से मिली राहत
अदालत ने ताहिर हुसैन को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147 (दंगा करना) और धारा 109 (उकसाना) के तहत दोषी पाया है। हालांकि, सबूतों की कमी के चलते कोर्ट ने उन्हें अन्य गंभीर आरोपों, जैसे घातक हथियारों से दंगा करने, चोरी, आगजनी और घर में जबरन घुसने के आरोपों से बरी कर दिया। वहीं, इस मामले में शामिल 12 अन्य सह-आरोपियों को सभी आरोपों से पूरी तरह बरी कर दिया गया है। बरी होने वालों में मोहम्मद शादाब, शाह आलम, रियासत अली, गुलफाम, राशिद सैफी, मोहम्मद रिहान, मोहम्मद आबिद, अरशद कय्यूम, इरशाद अहमद, दीपक सिंह सैनी, नवनीत और महक सिंह शामिल हैं।
हुसैन की सजा की अवधि तय करने के लिए कोर्ट ने 16 नवंबर 2026 की तारीख तय की है। वर्तमान दोषसिद्धि के आधार पर उन्हें अधिकतम दो साल की जेल या जुर्माना, या दोनों भुगतने पड़ सकते हैं।
बता दें कि 2020 के दंगों से जुड़े मामलों में यह ताहिर हुसैन की दूसरी दोषसिद्धि है। इससे पहले 13 जुलाई को उन्हें इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है। ताहिर हुसैन पहले आम आदमी पार्टी (AAP) के पार्षद थे, लेकिन फरवरी 2020 में आरोपों के बाद उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया था। इसके बाद 2024 में उन्होंने AIMIM का दामन थामा और 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में इसी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़े, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा।