सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के कामकाज के खिलाफ याचिका पर सुनवाई की दी मंजूरी

Kittu Kumari29 September 20263 min read4 viewsNational
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के कामकाज के खिलाफ याचिका पर सुनवाई की दी मंजूरी

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अगले हफ्ते चुनाव आयोग के कामकाज के तरीके को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई करने के लिए सहमति दे दी है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि एक बहु-सदस्यीय संवैधानिक निकाय के रूप में चुनाव आयोग में निहित शक्तियों का इस्तेमाल कानून द्वारा अनिवार्य सामूहिक निर्णय लेने की प्रक्रिया का पालन किए बिना किया जा रहा है। वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख किया और मामले की जल्द सुनवाई की मांग की। याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह ने अनुच्छेद 32 के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ निर्देश देने की मांग की है। याचिका में तर्क दिया गया है कि सीईसी व्यक्तिगत रूप से अनुच्छेद 324 द्वारा चुनाव आयोग को एक निकाय के रूप में दी गई शक्तियों का प्रयोग नहीं कर सकते हैं।

याचिका में अक्टूबर 2025 और अगस्त 2026 के बीच चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा दर्ज की गई कम से कम 14 समकालीन आपत्तियों का हवाला दिया गया है। इन आपत्तियों में आरोप शामिल हैं कि आयोग की मंजूरी के बिना ईसीआई के नाम से संचार जारी किए गए, एक साल से अधिक समय तक बैठकों के एजेंडे और मिनट प्रसारित नहीं किए गए, और दो आयुक्तों की भागीदारी या अनुमोदन के बिना मतदाता सूची प्रणालियों में बदलाव किए गए। एक मुख्य शिकायत मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान फॉर्म 6 में बदलाव से संबंधित है। आयुक्त जोशी ने कथित तौर पर आपत्ति जताई थी कि जनप्रतिनिधि नियम, 1960 में संशोधन किए बिना एसआईआर-लिंक खुलासे की आवश्यकता के लिए फॉर्म को बदला नहीं जा सकता है, जिसे बाद में संधू ने भी समर्थन दिया था।

याचिका में मतदाता सूची डेटाबेस के केंद्रीकरण और वैधानिक क्षेत्र-स्तरीय अधिकारियों द्वारा ईआरओनेट और ईसीआईएनईटी तक पहुंच को लेकर भी चिंताएं उठाई गई हैं। जोशी ने डेटाबेस एक्सेस क्रेडेंशियल के स्वतंत्र ऑडिट का प्रस्ताव रखा था, जबकि संधू ने बाद में वैधानिक चुनावी अधिकारियों को उपलब्ध पहुंच को प्रतिबंधित करने के लिए ईसीआई के महानिदेशक (आईटी) के अधिकार पर सवाल उठाया था। एक अन्य मुद्दा न्यायिक अधिकारियों द्वारा निर्देशित मतदाताओं के खिलाफ पश्चिम बंगाल अपीलीय न्यायाधिकरणों के समक्ष ईसीआई के नाम पर दायर अपीलों से संबंधित है। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि अनुच्छेद 324 चुनावी शक्तियों को अकेले सीईसी में नहीं बल्कि चुनाव आयोग में निहित करता है।

याचिका में मुख्य रूप से टीएन शेषन बनाम भारत संघ मामले में 1995 के सुप्रीम कोर्ट के संविधान पीठ के फैसले पर भरोसा किया गया है। याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा 18 का भी हवाला दिया गया है, जो यह प्रदान करती है कि आयोग के व्यवसाय को जहाँ तक संभव हो सर्वसम्मति से और जहाँ सदस्य भिन्न हों, बहुमत से तय किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता ने आयोग के प्राथमिक रिकॉर्ड की जांच की मांग की है। अंतरिम राहतों में मतदाता सूची के डेटा और ऑडिट ट्रेल का संरक्षण, फॉर्म 6 में आगे के बड़े बदलाव के खिलाफ निर्देश और मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में ज्ञानेश कुमार के कामकाज पर रोक लगाने की मांग शामिल है।

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