Supreme Court में दिल्ली के 10 साल पुराने डीजल वाहन बैन के खिलाफ याचिका पर होगी सुनवाई

Kittu Kumari6 August 20262 min read54 viewsDelhi Local
Supreme Court में दिल्ली के 10 साल पुराने डीजल वाहन बैन के खिलाफ याचिका पर होगी सुनवाई

Supreme Court में दिल्ली-NCR में 10 साल पुराने डीजल वाहनों पर लगे बैन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की जाएगी। एक Volvo car owner की शिकायत पर Supreme Court of India सुनवाई करने के लिए राजी हो गया है, जिनकी 10 साल पुरानी डीजल गाड़ी का PUCC (Pollution Under Control Certificate) रिन्यू करने से मना कर दिया गया था।

  • 5 अगस्त 2026 को Chief Justice of India Surya Kant ने इस याचिका पर सुनवाई करने की बात कही और मालिक को प्रदूषण विरोधी उपायों का समर्थन करने को कहा।
  • गाड़ी का पीयूसीसी 25 फरवरी 2026 को एक्सपायर हो गया था, जिसके बाद वैध सर्टिफिकेट न होने के कारण फ्यूल स्टेशन द्वारा ईंधन न मिलने से गाड़ी चलना बंद हो गई है।

वाहन आयु प्रतिबंध और नियम

यह मामला Delhi-NCR क्षेत्र में National Green Tribunal (NGT) और Supreme Court के निर्देशों से जुड़े वाहन आयु प्रतिबंधों के मुद्दों को उठाता है। मौजूदा नियमों के अनुसार, गाड़ी की स्थिति चाहे जैसी भी हो, 10 साल से पुराने डीजल वाहनों और 15 साल से पुराने पेट्रोल वाहनों के सड़कों पर चलने पर बैन है। Commission for Air Quality Management (CAQM) ने दिल्ली के पेट्रोल पंपों को 1 जुलाई 2025 से इन पुरानी गाड़ियों को ईंधन देने से मना करने का निर्देश दिया था, जिसे 1 अप्रैल 2026 तक पूरे एनसीआर में लागू किया जाना तय किया गया था। दिल्ली के 520 में से लगभग 500 पेट्रोल पंपों पर VAHAN database से गाड़ी की उम्र की जांच करके इसे लागू करने के लिए ANPR (Automatic Number Plate Recognition) कैमरे लगाए जा रहे हैं।

पुराने वाहनों पर पिछली अदालती कार्रवाई और दिल्ली सरकार का रुख

इस मामले में पिछले Supreme Court के आदेशों में 12 अगस्त 2025 को पुरानी गाड़ियों पर सख्त कार्रवाई के खिलाफ अस्थायी राहत दी गई थी, जिसे बाद में 17 दिसंबर 2025 को संशोधित किया गया था। यह नया आदेश सख्ती से BS-IV और नए एमिशन स्टैंडर्ड वाले वाहनों पर लागू किया गया, जिससे BS-III और पुराने मॉडल्स के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति मिल गई। Delhi government ने Supreme Court's 2018 ruling के रिव्यू की मांग की है, जिसमें यह तर्क दिया गया है कि उम्र के आधार पर लगाया गया बैन मिडिल क्लास परिवारों और अच्छी स्थिति वाले वाहनों के मालिकों के लिए अनुचित है। सरकार ने इसके बजाय असल वाहन फिटनेस और प्रदूषण स्तर पर ध्यान केंद्रित करने वाली एमिशन-बेस्ड पॉलिसी की वकालत की है।

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