सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में बढ़ते यौन उत्पीड़न के मामलों पर लिया स्वतः संज्ञान

Kittu Kumari28 September 20262 min read1 viewNCR
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में बढ़ते यौन उत्पीड़न के मामलों पर लिया स्वतः संज्ञान

दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में यौन उत्पीड़न की बढ़ती घटनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 28 सितंबर 2026 को स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्यवाही शुरू की। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने सवाल उठाया कि 2012 के निर्भया मामले के चौदह साल बाद भी महिलाओं की सुरक्षा के लिए बने सिस्टम में कोई सुधार क्यों नहीं दिखा है। अदालत ने कई गंभीर अपराधों का हवाला दिया, जिसमें आस्था कुंज पार्क में 21 सितंबर का गैंग-रेप, स्वरूप नगर में एक नाबालिग के साथ गैंग-रेप और ग्रेटर नोएडा से दिल्ली आ रही स्लीपर बस के अंदर एक नाबालिग का यौन उत्पीड़न शामिल है। अदालत में पेश की गई मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर महीने के दौरान अकेले दिल्ली में यौन उत्पीड़न के कम से कम 13 मामले दर्ज किए गए थे। इस बारे में अधिक जानकारी यहां देखें।

सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा पर सवाल

अदालत के जजों ने देखा कि कम गश्त, खराब रोशनी और अपर्याप्त निगरानी के कारण पार्क, सड़कें और मेट्रो स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थान उच्च जोखिम वाले क्षेत्र बन गए हैं। बेंच ने इस बात पर जोर दिया कि हिंसा से मुक्त और सम्मान के साथ जीने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 का एक मुख्य हिस्सा है। इसके परिणामस्वरूप, अदालत ने अपनी रजिस्ट्री को एक स्वतः संज्ञान जनहित याचिका दर्ज करने का निर्देश दिया और दिल्ली पुलिस तथा प्रशासनिक अधिकारियों से इन प्रशासनिक कमियों पर औपचारिक जवाब मांगा है।

अधिकारियों को चार सप्ताह का समय

अदालत ने विशेष रूप से आस्था कुंज में सुरक्षा को लेकर दिल्ली विकास प्राधिकरण की भूमिका की जांच की और सीसीटीवी नेटवर्क के काम न करने पर दिल्ली सरकार की आलोचना की। बेंच ने आदेश दिया कि अधिकारी ठोस और मापने योग्य सुरक्षा उपाय लागू करें और चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दें। अदालत ने कहा कि व्यवस्था की इस विफलता को दूर करने के लिए केवल एकजुटता व्यक्त करना ही काफी नहीं है।

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