सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर बस गैंगरेप मामले पर स्वतः लिया संज्ञान, अधिकारियों से मांगी रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 28 सितंबर 2026 को दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में 4 अगस्त 2026 को हुई 16 वर्षीय लड़की के गैंगरेप मामले का स्वतः संज्ञान लिया है। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और के विनोद चंद्रन की पीठ ने इस घटना को कानून व्यवस्था की प्रणालीगत विफलता बताया है और 2012 के निर्भया मामले की याद दिलाई है। अदालत ने अधिकारियों से सार्वजनिक सुरक्षा उपायों और यौन अपराधियों के राष्ट्रीय डेटाबेस के उपयोग पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। पीडिता उत्तर प्रदेश के मैनपुरी की रहने वाली है और नोएडा सेक्टर 63 जाने के लिए ग्रेटर नोएडा के परी चौक पर एक स्लीपर बस में चढ़ी थी। इस बस को 39 वर्षीय कुलदीप और 26 वर्षीय संदीप चला रहे थे, जिन्हें घटना के चार घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया गया था। दोनों आरोपी कानपुर के हैं और उन्हें बिना अनिवार्य पुलिस सत्यापन के रखा गया था। बस ने कश्मीरी गेट पुरानी दिल्ली तक लगभग 47 किलोमीटर की दूरी तय की, जिसके बाद पीड़िता को छोड़ दिया गया। दिल्ली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और पॉक्सो अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की है। जांचकर्ताओं ने बस से महत्वपूर्ण फोरेंसिक साक्ष्य एकत्र किए हैं, जिसमें पीड़िता और आरोपियों के फिंगरप्रिंट, बाल और वीर्य के नमूने शामिल हैं, जिन्हें त्वरित जांच के लिए फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेज दिया गया है। पुलिस ने आरोपियों के कपड़े और बस की सीटों और स्टीयरिंग व्हील से भी नमूने जब्त किए हैं, और वे चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी कर रहे हैं। जांच में यह भी सामने आया कि इस बस पर परमिट उल्लंघन और ओवरस्पीडिंग के लिए 63,000 रुपये के 12 चालान लंबित थे। वाहन में काम करने वाले सीसीटीवी कैमरे और पैनिक बटन नहीं थे, जो सार्वजनिक परिवहन के लिए आवश्यक सुरक्षा विशेषताएं हैं। 2012 के निर्भया मामले में पीड़िता का प्रतिनिधित्व करने वाली अधिवक्ता सीमा कुशवाहा ने सार्वजनिक रूप से पुलिस की प्रतिक्रिया और सुरक्षा जांच की कमी पर सवाल उठाया है।