सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर लिया स्वतः संज्ञान

28 सितंबर 2026 को, भारत के सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ बढ़ते यौन अपराधों पर स्वतः संज्ञान लिया। इस मामले में न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने सुनवाई की और प्रशासनिक विफलता पर सवाल उठाए। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को संवेदनशील इलाकों का सुरक्षा ऑडिट करने का निर्देश दिया है।
विशेष टीमों का गठन और रिपोर्ट
दिल्ली पुलिस कमिश्नर को हर पुलिस जिले के लिए डीएसपी रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में विशेष टीमें गठित करने का आदेश दिया गया है, जिन्हें चार हफ्ते के भीतर बनाना होगा। इसके साथ ही, दिल्ली हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को चार हफ्ते के भीतर फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट और पोक्सो अदालतों की स्थिति पर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।
सख्त निर्देश और घटनाएं
पीठ ने सुस्ती और प्रशासनिक लापरवाही की आलोचना की और कहा कि सार्वजनिक स्थल 'हाई-रिस्क जोन' नहीं बनने चाहिए। कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला दिया। वरिष्ठ अधिवक्ता लिज मैथ्यू को न्याय मित्र (Amicus Curiae) नियुक्त किया गया है और अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी। यह हस्तक्षेप 21 सितंबर को आस्थाय कुंज पार्क में 17 वर्षीय लड़की के कथित गैंगरेप और 4 अगस्त को ग्रेटर Noida से दिल्ली आ रही बस में नाबालिग के यौन उत्पीड़न जैसी घटनाओं के बाद हुआ है।
प्रशासनिक और संपादकीय प्रतिक्रिया
स्थिति से निपटने के लिए, उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने 28 सितंबर को उच्च स्तरीय बैठक की। पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने सुरक्षा समीक्षा शुरू की है और 25 सितंबर तक 1,500 पार्कों का निरीक्षण किया गया है। जनसत्ता ने 29 सितंबर 2026 को 'Jawabdehi se door tantra: Kya Delhi mein ab bhi surakshit nahi hain mahilayein?' शीर्षक से संपादकीय प्रकाशित किया, जिसमें न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता पर जनता की नाराजगी को रेखांकित किया गया।